लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगर निगम प्रशासन ने रविवार को कड़े पुलिस पहरे के बीच कचहरी और कोर्ट परिसर के आसपास बने अवैध चैंबरों पर ध्वस्त करने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। कैसरबाग स्थित पुराने हाईकोर्ट परिसर, जिला सत्र न्यायालय, निबंधन कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय के आसपास नाले, नालियों और फुटपाथों पर बने अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए नगर निगम ने पूरी ताकत झोंक दी। इस दौरान कार्रवाई का विरोध कर रहे नाराज वकीलों ने नारेबाजी की, हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण नगर निगम की टीम अपना काम करती रही।

10 बुलडोजर और 10 हाइवा से महा-अभियान

रविवार सुबह से ही नगर निगम की टीम लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंच गई। अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए:

  • 10 बुलडोजर (जेसीबी) को एक साथ चैंबरों को ध्वस्त करने के लिए लगाया गया।
  • 10 हाइवा ट्रक मौके पर ही मलबा हटाने और उठाने का काम कर रहे हैं।

कार्रवाई से आक्रोशित अधिवक्ताओं ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए ध्वस्तीकरण को तत्काल रोकने की मांग की। वकीलों ने चेतावनी देते हुए कहा कि "इस मनमानी कार्रवाई का करारा जवाब वर्ष 2027 के चुनावों में दिया जाएगा।"

211 चैंबरों पर मंडराया ध्वस्तीकरण का खतरा

नगर निगम के अनुसार, नाले और नालियों के ऊपर अवैध तरीके से बनाए गए कुल 211 चैंबरों को सर्वे के आधार पर चिह्नित किया गया था।

  • कानूनी प्रक्रिया: वकीलों ने इस कार्रवाई को रोकने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी।
  • आपत्तियों का निस्तारण: नगर निगम ने चैंबर खाली करने का नोटिस बहुत पहले ही जारी कर दिया था। नोटिस के जवाब में आई 14 आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद ही यह कार्रवाई शुरू की गई।
  • पहले टली थी कार्रवाई: यह ध्वस्तीकरण 11 अक्टूबर को होना था, लेकिन आपत्तियों और अपील के कारण इसे टालना पड़ा था। इससे पूर्व मई से अगस्त के बीच दो चरणों में 72 अवैध चैंबर तोड़े जा चुके हैं।

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हाईकोर्ट की जनहित याचिका और सर्वे का इतिहास

हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान एक साल पहले नगर निगम ने कचहरी परिसर के आसपास की सड़कों का गहन सर्वे कराया था। उस सर्वे में 241 अवैध चैंबर पाए गए थे। 72 चैंबरों को तोड़े जाने के बाद शेष चैंबरों पर कार्रवाई न होने को लेकर कोर्ट में सवाल खड़े किए गए थे।

प्रशासन का पक्ष

"माननीय हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में कचहरी परिसर के बाहर नाले, नालियों, फुटपाथ और मुख्य सड़क पर बने सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाया जा रहा है। इसके लिए नियमानुसार नोटिस और सुनवाई का पूरा समय दिया गया था।"
— ओम प्रकाश सिंह, जोनल अधिकारी, नगर निगम (लखनऊ)

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