लेह। पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के बाद भारत ने लद्दाख में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और कृषि विकास कार्य को अंजाम दिया है। लेह जिले के उप्शी क्षेत्र में बिना सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल किए, सिर्फ प्राकृतिक पत्थरों से एक अनोखा चेक डैम तैयार किया गया है।

इस चेक डैम के बनने से सिंधु नदी का जलस्तर 10 फीट तक ऊपर उठ गया है, जिससे लद्दाख के बंजर खेतों को लगभग 4 करोड़ लीटर पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध हो सकेगा।

लद्दाख के किसानों के लिए वरदान

  • भौगोलिक चुनौती का समाधान: लद्दाख से होकर गुजरने के बावजूद सिंधु नदी गहरी घाटियों में बहती थी, जिससे बुआई के समय पंपों द्वारा पानी निकालना बेहद मुश्किल था।
  • सिंचाई के लिए पानी: जलस्तर 10 फीट ऊंचा होने से अब पानी को सिंचाई नहरों के माध्यम से उन सूखे खेतों तक आसानी से पहुंचाया जा रहा है जो लंबे समय से पानी की किल्लत झेल रहे थे।
  • सिंधु जल समृद्धि अभियान: उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस परियोजना का शुभारंभ किया है, जिससे लद्दाख की कृषि स्थिति में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।

पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें और कूटनीतिक हलचल

सिंधु जल समझौते के तहत पहले इस नदी का अधिकतर पानी पाकिस्तान की ओर चला जाता था और स्थानीय लद्दाख क्षेत्र प्यासा ही रह जाता था। संधि के निलंबन और भारत के इस जमीनी कदम से पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ गई हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हाल ही में एससीओ (SCO) सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं।

भविष्य की योजना: 36 नए चेक डैम की तैयारी

उप्शी में मिली इस सफलता के बाद लद्दाख प्रशासन ने सिंधु नदी और अन्य स्थानीय जल स्रोतों पर ऐसे ही ढांचे बनाने का विस्तृत खाका तैयार किया है:

  • लद्दाख प्रशासन ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को 36 नए चेक डैम का प्रस्ताव भेजा है।
  • इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत ₹56 करोड़ से अधिक बताई गई है।