प्रतिनिधि, बालूमाथ,लातेहार। खनिज संपदाओं की गोद में बसे झारखंड राज्य के लातेहार जिले में एक ऐसा स्कूल भी है जहां के बच्चे डर के साए में भी शिक्षा ले रहे हैं। यह स्कूल है जिले का राजकीय कृत कन्या मध्य विद्यालय बालूमाथ। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने में सरकार और शिक्षा विभाग करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है,लेकिन इस स्कूल के जर्जर भवन की मरम्मत के लिए आवंटन के लाले पड़े हैं।





स्कूल में 404 बच्चे पढ़ते हैं,जिनमें से 350 बच्चे हर दिन विद्यालय आते हैं। इस स्कूल में बालूमाथ प्रखंड के कई गांवों के बच्चे रोज पढ़ने आते हैं। सरकार की संवेदनहीनता और शिक्षा में गुणात्मक सुधार के दावों की यह विद्यालय पोल खोल रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर कई सवालिया निशान खड़े होते हैं और सरकार के आदेश सिर्फ फाइलों में सिमटकर ही रह जाते हैं।





स्कूल में चहारदीवारी नहीं होने से शराबियों और जुआरियों ने इसे अपना अड्डा बना लिया है। आलम यह है कि सुबह स्कूल शुरू करने से पहले शिक्षक और बच्चों को मिलकर स्कूल की सफाई करनी पड़ती है। दरअसल छुट्टी होते ही स्कूल शराबियों और जुआरियों का अड्डा बन जाता है। स्कूल की कक्षाओं में शराबियों की महफिल सजती है और जाम से जाम टकराते हैं। ऐसे में शराबियों के द्वारा फैलाई गई गंदगी को साफ करने के अलावा शिक्षकों और बच्चों के पास कोई चारा नहीं है।स्कूल की इस स्थिति से शिक्षक भी बेहद परेशान हो चुके हैं,लेकिन उनकी बात सुनने वाला यहां कोई नहीं है।





राजकीयकृत कन्या मध्य विद्यालय बालूमाथ की बदहाली और डर के साए में बच्चों के पठन-पाठन के मामले को लेकर जब पूर्वांचल सूर्य अखबार की टीम ने विद्यालय के प्रिंसिपल कमलेश कुमार पांडे से जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि हम ऑफिस में बैठे थे, हमारे ऊपर जर्जर छत का कुछ टुकड़ा गिर गया था,लेकिन हम बाल बाल बच गए। इसी तरह डर के साए में बच्चे भी पठन-पाठन कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान समय में जिला प्रशासन की ओर से एक भवन का निर्माण कराया गया है,लेकिन भवन को अभी तक हैंडोवर नहीं किया गया है।