प्रतिनिधि,साहिबगंज। लोकसभा आम चुनाव के परिपेक्ष्य के निमित्त सभी बीएलएमटी का प्रशिक्षण सिद्धो-कान्हू सभागार में आयोजित की गई।प्रशिक्षक के रूप में प्रभात कुमार सिंह ने प्रशिक्षण के माध्यम से बताया कि आदर्श आचार संहिता उस दिन से लागू हो जाती है,जिस दिन आयोग निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करता है। प्रशिक्षण में बताया गया कि चुनाव कार्य के कारण आचार संहिता का पूरी ईमानदारी के साथ पूर्ण पालन हो, ताकि चुनाव कार्य सुचारू रूप से संचालित और निष्पक्ष से रूप से आयोजित की जा सके। किसी भी राजनीतिक दल को किसी मंदिर, मस्जिद, चर्च या अन्य पूजा स्थलों का बैठक या चुनाव प्रचार के लिए मंच के रूप में उपयोग करने की अनुमति नहीं होती है। किसी भी राजनितिक दल को किसी प्रकार का जुलुस निकालने से पूर्व अनुमति लेनी होती है। जुलुस निकालने वाले दल या अभ्यर्थी को जुलुस का समय, स्थान और मार्ग पहले ही तय कर अनुमति लेनी होती है, ताकि आपके द्वारा सम्बंधित कार्रवाई हेतु तैयारी की जा सके।





प्रशिक्षण में निर्वाचन व्यय एवं उङनदस्ते (एफएस) की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि निर्वाचन व्यय दो प्रकार के होते हैं। पहला जिसकी अनुमति हो और दूसरा जिसकी अनुमति न हो। जैसे, रिश्वत, शराब, वस्तु का वितरण आदि।प्रथम प्रकार का व्यय, रैली, सभा, बैनर, पोस्टर, वाहन आदि पर निर्धारित सीमा तक अनुमानित व्यय, जो झारखण्ड राज्य संसदीय निर्वाचन क्षेत्र हेतु 95 लाख रूपये निर्धारित है। दूसरे प्रकार के व्यय की अनुमति नहीं है। यह भारतीय न्याय संहिता के तहत भ्रष्ट आचरण में आता है।प्रतिनिधि प्रचार, विज्ञापन या पेड न्यूज़ पर किए गए व्यय का विवरण भी देना अनिवार्य है। इसकी मोनिटरिंग मीडिया सर्टिफिकेशन (MCMC) के द्वारा लगातार की जाएगी। ऐसे विज्ञापन को व्यय में जोड़ा जाएगा।





इस सन्दर्भ में बताया गया कि अभ्यर्थियों द्वारा दैनिक रूप से किए जा रहे व्ययों की निगरानी हेतु व्यय अनुवीक्षण तंत्र का गठन किया गया है। इस हेतु व्यय प्रेक्षक के नेतृत्व में सहायक प्रेक्षक, लेखादल, एफएस,वीएसटी, एमसीएमसी कॉल सेंटर, इत्यादि बनाए जाएंगे।





प्रत्येक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में तीन या अधिक समर्पित उङनदस्ते का गठन किया जाएगा, जो नकदी का अवैध आदान-प्रदान या शराब का वितरण या अन्य कोई संदेहास्पद वस्तुएं, जो मतदाताओं को घूस देने के लिए प्रयोग में लाई जा रही हो, उसका पता लगाएंगे। उड़न दस्ते में टीम का प्रमुख एक वरिष्ठ कार्यकारी मजिस्ट्रेट होगा, पुलिस स्टेशन का एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, एक वीडियोग्राफर और 3-4 सशस्त्र पुलिस कर्मी होंगे। उनको नकदी या सामान इत्यादि की जब्ती के लिए, एक वाहन, मोबाइल फोन, एक वीडियो कैमरा और अपेक्षित पंचनामा दस्तावेज दिए जाएंगे।





मौके पर प्रशिक्षक के रूप में आशीष कुमार, मनोहर शर्मा, उज्जवल बनर्जी मौजूद रहे।