नेहा कुमारी।शक्ति आराधना के पर्व वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ 9 अप्रैल को हो गया। प्रथम दिवस पर मां शैलपुत्री के दर्शन,पूजन और आराधना का विधान है। पर्वतराज हिमालय के घर कन्या के रूप में अवतरित होने पर इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।मां शैलपुत्री जीवन के हरेक क्षेत्र में हमें सफलता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने की शक्ति प्रदान करती हैं।
आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना आंतरिक ऊर्जा का अद्भुत स्रोत है। मां जगदंबे द्वारा प्रदत्त ऊर्जा से हमें एक दूसरे से प्रेम करने और मानवता की सेवा करने की शक्ति मिलती है। इससे सत्य, प्रेम और करुणा का भाव उत्पन्न होता है। मानवता के साथ-साथ धर्म-आध्यात्म के प्रति निष्ठा विकसित होती है।
नवदुर्गा हमें ऊर्जा देती हैं। इससे एक दूसरे से प्रेम करने की भावना जागृत होती है। आदिशक्ति की आराधना से विश्व कल्याण व संसार की सुख-समृद्धि के लिए सकारात्मक सोच की शक्ति मिलती है।इस संसार के मूल में आदिशक्ति है।
इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 9 अप्रैल को कलश स्थापना का मुहूर्त और नवमी 17 अप्रैल को है।शक्ति की अधिष्ठात्री मां जगदंबा की पूजा-अर्चना का पर्व वसंतिक नवरात्र 9 अप्रैल से शुरू होकर पूरे 9 दिनों तक होगा।इसका समापन 17 अप्रैल को होगा।





