कृषि: नई दिल्ली में कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के 36वें दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया। ‘विकसित भारत @2047 के लिए कृषि उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में कृषि शिक्षा को व्यावहारिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए दूरगामी सुधारों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
सम्मेलन के प्रमुख बिंदु और दिए गए सुझाव:
- किसानों की जरूरतों से जुड़ाव: शिवराज सिंह चौहान ने जोर दिया कि कृषि शिक्षा की सफलता का आकलन दी गई डिग्रियों की संख्या के बजाय सृजित कौशल और किसानों के जीवन में आए ठोस बदलाव से होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों, ICAR, केवीके (KVK) और FPO के बीच मजबूत समन्वय पर बल दिया।
- तकनीक, नवाचार और युवाओं का आकर्षण: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और राम नाथ ठाकुर ने कहा कि शोध को खेत स्तर के व्यावहारिक समाधानों में बदलना होगा। उन्होंने युवाओं को कृषि और एग्री-बिजनेस की ओर आकर्षित करने के लिए आधुनिक तकनीक और उद्यमिता को बढ़ावा देने की बात कही।
- मौलिक बदलाव और उद्योग-अकादमिक साझेदारी: DARE के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़कर भविष्य के लिए तैयार इकोसिस्टम बनाना होगा। उन्होंने गुणवत्ता, मान्यता व्यवस्था, डेटा आधारित निर्णय और वैज्ञानिक ज्ञान के विस्तार पर जोर दिया।
- सुगम और समावेशी कृषि शिक्षा: सम्मेलन में ICAR-AIQ काउंसलिंग, पशु चिकित्सा विज्ञान के लिए अलग PhD काउंसलिंग, तथा हिंदी माध्यम व कृषि पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए स्नातक पात्रता को सुलभ और समावेशी बनाने पर चर्चा हुई।
प्रस्तावित सुधार और रणनीतिक एजेंडा:
| क्षेत्र | प्रस्तावित प्रमुख कदम व सुधार |
| अकादमिक व संकाय विकास | 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' को शामिल करना, कृषि व संबद्ध विज्ञान में डिग्रियों की समानता, तथा प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करना। |
| उद्योग व अनुसंधान संबंध | अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप, दोहरी/संयुक्त डिग्री पाठ्यक्रम, और टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) को बढ़ावा देना। |
| संस्थागत उत्कृष्टता | JRF/SRF शोध को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ना, एनआईआरएफ (NIRF) रेटिंग मानदंड लागू करना, और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण। |
निष्कर्ष
सम्मेलन का अंतिम उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग को एक साथ जोड़कर ऐसा परिणाम-आधारित इकोसिस्टम विकसित करना है, जो वैज्ञानिक ज्ञान को किसानों के लिए उपयोगी समाधानों में बदलकर भारत को 2047 तक कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सशक्त बना सके।





