नई दिल्ली:
80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1947 के देश-विभाजन की त्रासदी झेलने वाले अनगिनत लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक अत्यंत भावुक संदेश साझा करते हुए उन्होंने बंटवारे के दौरान देशवासियों द्वारा सहे गए अकल्पनीय दर्द, विस्थापन और संघर्षों को नमन किया।
"इतिहास का वह दौर बेहद डरावना और दर्दनाक था"
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि 1947 का वह कालखंड भारतीय इतिहास के सबसे काले और दर्दनाक अध्यायों में से एक है, जिसने रातों-रात हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया।
पीएम मोदी के संदेश के मुख्य अंश: "बंटवारे की भीषण त्रासदी के कारण अनगिनत लोगों को अपनी जड़ें छोड़कर जाने पर मजबूर होना पड़ा। लोगों ने अपने अपनों को खोया और जो शारीरिक व मानसिक पीड़ा सही, उसकी कल्पना करना भी नामुमकिन है। यह दौर इतिहास का अत्यंत भयानक और हृदयविदारक हिस्सा रहा है।"
विपत्ति को बनाया ताकत, शून्य से रची कामयाबी
त्रासदी के मंजर को याद करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने बंटवारे से प्रभावित लोगों के अदम्य साहस और जीवटता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा:
- शून्य से नई शुरुआत: सब कुछ खो देने के बावजूद पीड़ित परिवारों ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के बल पर जीवन को दोबारा खड़ा किया।
- संकट को बनाया शक्ति: पीड़ितों ने हर असफलता और मुसीबत को अपनी ताकत में बदला तथा राष्ट्र के निर्माण और प्रगति में ऐतिहासिक योगदान दिया।
- इंसानी जज्बे की मिसाल: उनका यह संघर्ष हर भारतीय के लिए मानवीय जिजीविषा और असली ताकत की प्रेरणादायक मिसाल है।
आपसी सौहार्द और विकसित भारत का संकल्प
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने समस्त देशवासियों से सामाजिक ताने-बाने और भाईचारे को अक्षुण्ण रखने की अपील की।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह दिन केवल अतीत के आंसुओं को याद करने का नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि हम देश में आपसी मेल-मिलाप, भाईचारा और सौहार्द को हर कीमत पर बनाए रखेंगे। साथ ही, एकजुट होकर एक मजबूत, अखंड और विकसित भारत के निर्माण के सपने को साकार करेंगे।





