श्रीगंगानगर। जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का क्रियान्वयन तेजी से किया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जिले में कुल 45 क्लस्टरों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे 5,625 किसानों को अनुदान का लाभ मिलेगा। प्रत्येक क्लस्टर का क्षेत्रफल 50 हेक्टेयर होगा, जिसमें 125 किसान शामिल होंगे। योजना के तहत प्रति किसान 0.4 हेक्टेयर (1 एकड़) क्षेत्रफल के लिए अनुदान सहायता देय होगी।

इसी क्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, पदमपुर में चयनित कृषि सखियों और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) के लिए आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन प्रमाण पत्र वितरण के साथ हुआ।

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प्राकृतिक खेती से सुधरेगा मृदा स्वास्थ्य और बढ़ेगी जल धारण क्षमता

कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी एवं कृषि अनुसंधान अधिकारी जगजीत सिंह ने बताया कि यह पद्धति देसी गाय के पशुधन, बीजामृत, जीवामृत, घन-जीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और बायोमास आधारित मल्चिंग पर आधारित है। यह योजना छोटे जोत के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी डॉ. सीमा चावला ने कहा कि जिले में रासायनिक खादों से दूषित हो चुकी भूमि को पुनः जीवंत करने के लिए प्राकृतिक खेती आवश्यक है। वहीं, डॉ. नवल कम्बोज ने बताया कि प्राकृतिक पद्धतियां मिट्टी में जैविक कार्बन और नमी बनाए रखने की क्षमता को बढ़ाती हैं।

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कृषि अनुसंधान अधिकारी डॉ. दुष्यंत ने प्राकृतिक खेती को जलवायु अनुकूल और किसान की लागत कम करने वाली पद्धति बताया। विषय वस्तु विशेषज्ञ राजवीर चौधरी ने कहा कि यह विविधीकरण को बढ़ावा देकर कृषि जैव विविधता को मजबूत करती है।

प्रशिक्षण के अंतिम दिन पंचायत समितियों से आई कृषि सखियों और CRP को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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