पूसू प्रतिनिधि,गिरिडीह। सऊदी अरब में फंसे गिरिडीह,बोकारो और हजारीबाग के 45 मजदूरों ने एक सप्ताह बीत जाने के बाद पुनः विडियो साझा कर अपनी आपबीती सुनाते हुए वापसी के लिए गुहार लगाई है।उन्होंने कहा कि पिछले 11 मई 2023 को मोबाइल टाॅवर खडे़ करने वाली कमर्शियल टेक्नोलॉजी पल्स नामक कंपनी में काम करने के लिए सऊदी अरब गये थे।हमलोग 55 हजार रुपये कमीशन देकर यहां आए थे।भारत से सऊदी अरब ले जाते समय हमारे साथ एग्रीमेंट किया गया था कि लाइनमैन को 1500 रियाल,ओवरटाइम का 700 रियाल मिलेंगे। हम यहां सात महीने से काम कर रहे हैं, जिसमें से हमें सिर्फ दो महीने का वेतन दिया गया है, हमें बकाया नहीं दिया जा रहा है।अगर हम उनसे बकाये की मांग करते हैं तो हमसे जबरदस्ती काम कराया जाता है और जेल में डालने की धमकी दी जाती है।जिसके कारण सभी मजदूर दाने-दाने को मोहताज हो गये है।इधर मजदूरों के परिजन परेशान हैं।





प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले समाजसेवी मजदूरों की आवाज उठाने वाले सिकन्दर अली का कहना है कि सरकार कंपनी पर दबाव बनाकर मजदूरों को बकाया मजदूरी और वतन वापसी का टिकट दिलाए।मजदूर के परिजन यहां बिलख रहे हैं।कहा कि जब काम की तलाश में मजदूर विदेश जाते हैं, तब उन्हें वहां कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती है और बड़ी मुश्किल से वे वतन लौट पाते हैं।इसके बावजूद प्रवासी मजदूर पुरानी घटनाओं से सबक नही ले रहे है।ऐसे में सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।