दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के साउथ कैंपस स्थित सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से हुई सात लोगों की मौत के बाद राजधानी की राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने इस भीषण हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
'हर बार का शर्मनाक पैटर्न'—राहुल गांधी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हादसों से पहले सुरक्षा के कदम न उठाना और हादसे के बाद महज दिखावा करना भाजपा सरकार की आदत बन चुकी है।
- जवाबदेही से बचाव: राहुल गांधी ने कहा कि ऐसी त्रासदियों के बाद केवल निचले स्तर के छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जाता है, जबकि असली जिम्मेदार लोग बच निकलते हैं।
- दिल्ली की घटनाओं का हवाला: उन्होंने सैदुलाजाब हादसा (6 मौतें) और हौज रानी अग्निकांड (22 मौतें) का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में बार-बार युवाओं और छात्रों के सपने मलबे में दब रहे हैं।
- 'लाचार नीयत' पर तंज: उन्होंने कहा, "दिल्ली में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार है, फिर भी सरकार किस बात से लाचार है? दरअसल लाचारी नीयत की है, क्योंकि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी खत्म हो जाती है।"
कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस: 1 करोड़ मुआवजा और रेंट कंट्रोल की मांग
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन की विफलता पर गंभीर आरोप लगाए।
- प्रशासन पर सच छिपाने का आरोप: कांग्रेस ने दावा किया कि हादसे के 24 घंटे बाद भी मलबा पूरी तरह नहीं हटाया जा सका है और पुलिस-प्रशासन सही जानकारी साझा करने के बजाय पर्दा डालने में लगा है।
- मुख्य मांगें: विपक्षी दल ने मांग की है कि हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, छात्रों को सुरक्षित व किफायती आवास मिले और पीजी तथा हॉस्टल्स के लिए तत्काल 'रेंट कंट्रोल एक्ट' लागू किया जाए।
कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के बड़े-बड़े पार्टी दफ्तर तो कभी नहीं गिरते, लेकिन जनता और छात्रों के इस्तेमाल में आने वाले पुल, सड़कें और इमारतें लगातार ध्वस्त हो रही हैं।





