प्रतिनिधि,सिंदरी। ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से प्रसिद्ध कवि, नुक्कड़ नाटककार, फिल्म निर्देशक, गीतकार सफदर हाशमी की 35वें शहादत दिवस पर प्रियदर्शनी पार्क सिंदरी में विचार गोष्ठी रखी गई। विचार गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. काशीनाथ चटर्जी ने कहा कि सफदर हाशमी एक लोकप्रिय नाटककार निर्देशक, गीतकार थे। सफदर हाशमी ने कई नुक्कड़ नाटक भी किए। भारत में नुक्कड़ नाटक को पहचान दिलवाने में सफदर हाशमी ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।





सफदर हाशमी ने अपने नाटक गीत, संगीत, नुक्कड़ नाटक के जरिए समाज के शोषित वर्ग और वंचित लोगों के हक में आवाज बुलंद किए. सफदर हाशमी ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य से एमए किया। इसी दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सांस्कृतिक यूनिट और इप्टा से उनका गहरा जुड़ाव हो गया। उन्होंने जन नाट्य मंच की स्थापना की।





गाजियाबाद में हल्ला बोल का नुक्कड़ नाटक 1 जनवरी 1989 को करते समय माफिया ने उन के ऊपर कातिलाना हमला किया,जिसमें एक मजदूर राम बहादुर और उनकी मृत्यु 2 जनवरी को हो गई।उनकी शहादत के तीन दिन बाद उनकी पत्नी ने उस अधूरे नाटक को पूरा किया। साक्षरता आंदोलन में उनका लिखा और गया गीत पढ़ना लिखना सीखो ओ भूख से मरने वालों काफी प्रसिद्ध रही।





विचार गोष्ठी की अध्यक्षता विकास कुमार ठाकुर ने किया तथा हेमंत कुमार जयसवाल, राज नारायण तिवारी, शकीला बानो, रंजीत कुमार सिंह, सुरेश प्रसाद, गौतम प्रसाद, रानी मिश्रा, सविता देवी, सीता देवी, मिठू दास, सूर्य कुमार सिंह, सुबल चंद्र दास, आर के मिश्रा, प्रफुल्ल कुमार स्वैन्न, अनुश्री मिश्रा, राम लायक राम ने विचार रखा।