प्रतिनिधि,चतरा। झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्साकर्मी संघ का आन्दोलन अब और तेज होता हुआ दिख रहा है। सोमवार को सिविल सर्जन कार्यालय के समक्ष सैकड़ों आंदोलनकर्मी बैठे। स्वास्थ्य कर्मियों से बात करने पर पता चला कि स्वास्थ्य विभाग के अनुबंधकर्मी में अभी भी निराशा की स्थिति बनी हुई है, जिसका मुख्य कारण है सरकार गठन से अबतक स्वास्थ्य विभाग के अनुबंध कर्मी एलटी/एक्स रे/फार्मासिस्ट/एएनएम/जीएनएम/ नेत्र सहायक इत्यादि को अभी तक नियमितिकरण का लाभ नहीं मिला है, जबकि सरकार के चुनावी वादों के अनुसार इसे घोषणा पत्र में भी शामिल किया गया था। परन्तु अभी तक कोई संतोषजनक आश्वासन भी नही मिला।
आंदोलनकर्मियों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि पारा चिकित्सा कर्मी स्वास्थ्य विभाग में विगत 10-15 वर्षो से अल्प मानदेय पर वर्तमान कोविड-19 जैसी गंभीर परिस्थिति में भी फंड लाईन वर्कर के रूप में कार्य करते आ रहे हैं। उन्हें अब तक अछूता रखने से स्वास्थ्य कर्मियों में एक प्रकार से निराशा उत्पन्न हो रही है।जिससे आक्रोशित अनुबंध कर्मियों ने आंदोलन की ओर मुखर होने का रास्ता मजबूरन अपनाया है। जिसकी सारी जिम्मेदारी विभाग/सरकार की है। पारा मेडिकल नियमावली 2018 में आंशिक संशोधन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के सभी पारा मेडिकल कर्मियों का वर्ष 2014 की तरह विभागीय नियमितीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग की है।
स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा है कि 16 जनवरी को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया गया था परन्तु अबतक मांग पूरी नहीं हुई है। 17 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल और रांची राजभवन के पास धरना प्रदर्शन किया गया। इसके बावजूद भी मांग पूरी नहीं हुई।स्वास्थ्य कर्मियों ने बाध्य होकर 24 जनवरी से आमरण अनशन करने का निर्णय लिया है। जब तक पारा मेडिकल कर्मियों का विभाग नियमितीकरण नहीं किया जाएगा तब तक इस आंदोलन करते रहेगें। धरना में मुकेश कुमार,दिलेर खान,अजय कुमार,चंदन कुमार,सीता देवी,प्रमिला कुमारी,हिलारी एक्का,पूनम कुमारी,कांति कुमारी व सैकड़ो कर्मी मौजूद थे।





