सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के लिए पूर्ण छूट (फ्री हैंड) देने की मांग करने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने कड़े रुख में स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में युवाओं और छात्रों के भविष्य को संकट में नहीं डाला जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान बेहद संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के सामने जो युवा और छात्र खड़े हैं, उनके माता-पिता के बारे में भी सोचना होगा। उनका लंबा जीवन अभी बाकी है और वे अनावश्यक रूप से लंबे अदालती मुकदमों तथा कानूनी पचड़ों में नहीं फंसने चाहिए।
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हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी साफ कर दिया कि जो लोग आदतन या कुख्यात अपराधी हैं अथवा जिन पर गंभीर किस्म के अपराधों के आरोप हैं, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई पूरी मुस्तैदी से जारी रहेगी।





