स्कूल की घंटी बजते ही अक्सर बच्चों का रुख कैंटीन या आसपास के ठेलों की तरफ होता है, जहां चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, बर्गर, समोसे और चॉकलेट जैसी चीजें उनका इंतजार कर रही होती हैं। लेकिन अब बच्चों की इन पसंदीदा मगर सेहत के लिए नुकसानदेह चीजों की आसान उपलब्धता पर जल्द ही रोक लग सकती है। केंद्र सरकार के भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा तैयार किए जा रहे नए प्रस्ताव के तहत, स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, हाई शुगर और हाई साल्ट (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा रहा है।

क्या-क्या आएगा प्रतिबंध के दायरे में?

FSSAI के 2026 के मसौदे के अनुसार, प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य ठोस खाद्य पदार्थों में वसा, अतिरिक्त चीनी और नमक की तय सीमा निर्धारित करना है।

  • प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ: चिप्स, नमकीन स्नैक्स, मीठे पेय पदार्थ (कोल्ड ड्रिंक्स), बर्गर, पिज्जा, नूडल्स, समोसे, चॉकलेट और अन्य प्रसंस्कृत पैकेज्ड फूड।
  • विक्रेताओं पर नियम: स्कूलों के आसपास स्थित दुकानों, ठेलों और खाद्य विक्रेताओं पर HFSS उत्पाद बेचने की मनाही होगी। हालांकि, वे दुकानदार ऐसे खाद्य पदार्थ बेच सकेंगे जो HFSS श्रेणी में नहीं आते।

FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी के अनुसार, इस पहल का मकसद बच्चों को कम उम्र में ही अत्यधिक नमक, चीनी और वसा से दूर रखकर संतुलित और पौष्टिक आहार की ओर मोड़ना है। इससे खाद्य निर्माता कंपनियों को भी अपने उत्पादों में सामग्री की मात्रा पर पुनर्विचार करने की प्रेरणा मिलेगी।

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भारत में बच्चों में बढ़ता मोटापा

भारत में स्कूली बच्चों के बीच मोटापे और अधिक वजन (ओवरवेट) की समस्या तेजी से विकराल रूप ले रही है। विश्व मोटापा महासंघ के आंकड़ों के मुताबिक:

  • 2015: 5 से 19 वर्ष के अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या लगभग 2.8 करोड़ थी।
  • 2025: यह आंकड़ा बढ़कर 4.1 करोड़ हो गया।
  • 2040 (अनुमान): इसके बढ़कर लगभग 5.6 करोड़ तक पहुंचने की आशंका है।

सस्ते पैकेटबंद स्नैक्स, आकर्षक विज्ञापन और आसानी से उपलब्धता ने फास्ट फूड को बच्चों के बीच लोकप्रिय बना दिया है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।

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कारोबार पर असर और वैश्विक उदाहरण

हालांकि इस नीति का दूसरा पहलू यह भी है कि स्कूलों के पास स्थित छोटी किराना दुकानों, रेस्तरां, स्थानीय ठेलों और बड़ी F&B कंपनियों की आय प्रभावित हो सकती है। प्रतिबंध लागू होने पर विक्रेताओं को अपने मेनू और उत्पादों में स्वास्थ्यवर्धक बदलाव करने होंगे।

गौरतलब है कि यह मॉडल दुनिया के अन्य देशों में भी आजमाया जा चुका है। चिली जैसे देशों ने स्कूलों के आसपास अस्वास्थ्यकर भोजन के प्रचार और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। यदि भारत में यह 50 मीटर का दायरा लागू होता है, तो यह देश में बच्चों के खान-पान के माहौल को बदलने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम साबित होगा।