पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को लेकर राज्य की सम्राट चौधरी सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिंगापुर से सोशल मीडिया के जरिए बिहार के सियासी मुद्दों पर मुखर रहने वाली रोहिणी आचार्य ने इस योजना को पूरी तरह से 'किसान विरोधी' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर उपजाऊ जमीन छीनकर पूंजीपतियों और रियल एस्टेट बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश रच रही है।

उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण से खाद्य सुरक्षा को खतरा

रोहिणी आचार्य ने सैटेलाइट टाउनशिप के तहत हो रहे भूमि अधिग्रहण पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में बहु-फसली और बेहद उपजाऊ जमीनों का जबरन अधिग्रहण किया जा रहा है।

रोहिणी आचार्य का आरोप:
"कृषि योग्य जमीन का अधिग्रहण करने से राज्य की खाद्य सुरक्षा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। जमीन एक किसान परिवार के लिए पीढ़ियों की आजीविका का साधन होती है। छोटे और सीमांत किसानों से जमीन छीनकर उन्हें मजदूरी करने पर मजबूर किया जा रहा है।"

पर्यावरण और वाटर टेबल पर पड़ेगा बुरा असर

रोहिणी ने कहा कि कृषि योग्य जमीन पर कंक्रीट का जंगल खड़ा करने से स्थानीय पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा। हरे-भरे क्षेत्रों को नष्ट करने से जल स्तर (वाटर टेबल) काफी नीचे गिर जाएगा, जिससे आने वाले समय में गंभीर जल संकट और पर्यावरणीय समस्याएं पैदा होंगी।

नियम ताक पर रखने और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल

RJD नेता ने प्रशासनिक तंत्र पर भूमि अधिग्रहण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया:

  • कानूनी नियमों की अनदेखी: उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA) और किसानों की पूर्व सहमति लेने की अनिवार्य व्यवस्था का पालन नहीं किया जा रहा है।
  • सांसदों-विधायकों की चुप्पी: रोहिणी ने सांसदों और विधायकों की खामोशी पर हैरानी जताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की यह चुप्पी सत्ताधारी खेमे, कॉरपोरेट घरानों और बिल्डरों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है।

सरकार को दी सलाह: बंजर भूमि का करें इस्तेमाल

रोहिणी आचार्य ने कहा कि किसानों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करना विकास नहीं, बल्कि विनाश की पहल है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार सचमुच टाउनशिप विकसित करना चाहती है, तो उसे कृषि योग्य उपजाऊ भूमि के बजाय बंजर भूमि का चयन करना चाहिए, ताकि किसानों के अधिकारों और उनकी आजीविका की रक्षा की जा सके।