नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामने वाले 20 बागी सांसदों की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की याचिका पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब देने के लिए इन सांसदों ने गुरुवार (8 अक्टूबर) को दो हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा है। आज ही लोकसभा स्पीकर के ऑफिस की ओर से जवाब दाखिल करने की आखिरी तारीख तय की गई थी।
जवाब तैयार करने के लिए चाहिए और वक्त: काकोली घोष
बागी सांसदों में शामिल काकोली घोष दस्तीदार ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि सांसद इस बात पर कायम हैं कि उनके गुट बदलने से उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती, लेकिन उनके वकील अभी भी दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं, जिससे कानूनी जवाब तैयार नहीं हो सका है। समय सीमा खत्म होने के चलते उन्होंने स्पीकर को पत्र लिखकर दो हफ्ते की मोहलत मांगी है। इस सिलसिले में कोलकाता में हुई 20 बागी सांसदों की बैठक में भी नोटिस और आगे की कानूनी रणनीति पर गहन चर्चा की गई।
इसे भी पढ़ेंः देशभर में सियासी उबाल: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का राष्ट्रव्यापी विरोध, कांग्रेस मना रही 'ब्लैक डे'
टीएमसी का तीखा पलटवार: कुणाल घोष ने कहा 'मौकापरस्त'
बागी गुट द्वारा समय मांगे जाने पर ममता बनर्जी की अगुवाई वाली मूल टीएमसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता कुणाल घोष ने तंज कसते हुए कहा, "उन्हें खुद नहीं पता कि वे अब किस पार्टी में हैं और यह बताने के लिए भी उन्हें वक्त चाहिए। ये दलबदलू, मौकापरस्त और एहसान फरामोश लोग हैं, जो बीजेपी-विरोधी वोटों से चुनाव जीतकर अब बीजेपी के हितों के लिए काम कर रहे हैं। अब क्या वे एक अदद नोटिस का जवाब भी नहीं दे पा रहे?"
क्या है पूरा विवाद?
इसे भी पढ़ेंः 'लोकतंत्र खतरे में': मतदाता सूचियों से अवैध बेदखली और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर पूर्व SC जज ने जताई चिंता
- बगावत और समर्थन: पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी के 27 में से 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी से नाता तोड़कर 'NCPI' का दामन थाम लिया था और एनडीए (NDA) को समर्थन का ऐलान किया था।
- अभिषेक बनर्जी की याचिका: टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा 18 जून को दायर अयोग्यता याचिकाओं के बाद स्पीकर ने 25 सितंबर को इन बागी सांसदों को नोटिस जारी कर 8 अक्टूबर तक जवाब मांगा था।
- कानूनी और राजनीतिक तनातनी: बागी नेता अलग राजनीतिक पहचान और गुट की मान्यता मांग रहे हैं, जबकि ममता गुट इसे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत सीधा दलबदल बताकर सदस्यता रद्द करने की मांग पर अड़ा है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है, जहां स्पीकर से जल्द फैसले की मांग की गई है। इस बीच, बागी गुट के भविष्य और बीजेपी में संभावित विलय को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।
#टीएमसीबगावत #लोकसभास्पीकर #राहुलगांधी #कुणालघोष #दलबदलूकानून #पश्चिमबंगालराजनीति #इंडीगठबंधन #दिल्लीन्यूज़
#TMCRebellion #LokSabhaSpeaker #NCPI #KunalGhosh #AntiDefectionLaw #West BengalPolitics #IndianPolitics #DelhiNews





