सोलन (हिमाचल प्रदेश) पारंपरिक रूप से सेब, नाशपाती और आड़ू के लिए प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश का सोलन जिला अब एक नई कृषि क्रांति का गवाह बन रहा है। भारत में अभी तक बेहद सीमित मात्रा में उगाई जाने वाली विदेशी 'ब्लूबेरी' की व्यावसायिक खेती सोलन के धारों की धार क्षेत्र में पूरी तरह सफल साबित हुई है। इस सफलता से उत्साहित स्थानीय किसानों को बाजार में ब्लूबेरी के लिए 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक का बंपर दाम मिल रहा है।
आईएचडीएम योजना और प्रदर्शन केंद्रों की सफलता
यह अनूठी पहल केंद्र प्रायोजित एकीकृत बागवानी विकास मिशन (IHDM) के तहत शुरू की गई है।
- पौधों का रोपण: सोलन, कुनिहार और कंडाघाट ब्लॉक के चार प्रदर्शन केंद्रों पर लगभग 1,400 ब्लूबेरी के पौधे लगाए गए थे।
- शानदार पैदावार: दो साल पुराने पौधे, जो 6 से 12 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुके हैं, उन्होंने इस साल रिकॉर्ड उत्पादन दिया है।
- विस्तार की योजना: बागवानी विभाग अब 'एचपी सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर प्रोजेक्ट' के तहत 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में इसकी खेती का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है।
सेब के गढ़ में क्यों खास है यह प्रयोग?
बागवानी विभाग की उप निदेशक डॉ. शिवाली ठाकुर के अनुसार, भारत में बिकने वाली अधिकतर ब्लूबेरी विदेशों से आयात की जाती है। शहरी उपभोक्ताओं में इसके 'सुपरफूड' के रूप में लोकप्रिय होने से बाजार में मांग और दाम दोनों बहुत ऊंचे हैं।
- अनुकूल जलवायु: हिमाचल के मध्य पहाड़ी इलाकों में ठंडी जलवायु और पर्याप्त 'चिलिंग आवर्स' स्वाभाविक रूप से मिलते हैं, जो ब्लूबेरी के लिए आदर्श हैं।
- फसल विविधीकरण: कम जमीन वाले छोटे किसानों के लिए यह उच्च-मूल्य (High-Value) फसल प्रति एकड़ अधिक मुनाफा कमाने का बेहतरीन जरिया बन रही है।
- आयात पर निर्भरता में कमी: स्थानीय स्तर पर पैदावार होने से आयातित फलों पर निर्भरता कम होगी और सीधा लाभ किसानों की जेब में जाएगा।
विभाग अब इच्छुक किसानों को गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, तकनीकी प्रशिक्षण और सब्सिडी उपलब्ध कराने की तैयारी में है। यह प्रयोग हिमाचल के अन्य पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी एक टिकाऊ व्यावसायिक मॉडल के रूप में उभर रहा है।





