नई दिल्ली

1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। 'मनजिंदर सिंह सिरसा बनाम भारत संघ एवं अन्य' याचिका के तहत उन्होंने अदालत में खुद पेश होकर अपना पक्ष रखा। सिरसा ने 1 नवंबर 1984 को गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब पर हुए हमले और हिंसा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ की कथित भूमिका की आगे जांच (Further Investigation) कराने की पुरजोर मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की है।

क्या है पूरा मामला?

यह याचिका संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR नंबर 601/1984 से जुड़ी हुई है।

  • दर्दनाक हादसा: 1 नवंबर 1984 को असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों की भीड़ ने गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब पर हमला कर दिया था, जिसमें दो सिखों को जिंदा जला दिया गया था।
  • SIT का गठन और क्षेत्राधिकार: केंद्र सरकार ने 12 फरवरी 2015 को 1984 के बंद हो चुके मामलों की दोबारा जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। गृह मंत्रालय के 9 अप्रैल 2019 के निर्देशों के बाद एसआईटी ने स्पष्ट किया कि वह उन मामलों की भी आगे जांच कर सकती है जो बंद हो चुके थे।

गवाहों के बयानों और सबूतों का दिया हवाला

अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने नानावटी आयोग के सामने गवाही देने वाले मुख्तियार सिंह के बयानों का विशेष रूप से उल्लेख किया। मुख्तियार सिंह ने बाद में एसआईटी के सामने भी अपना बयान दर्ज कराया था।

सिरसा ने अपने 2018, 2019 और 2021 के ज्ञापनों का हवाला देते हुए कहा कि पहले के आयोगों के समक्ष पेश किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों की गहनता से जांच होना आवश्यक है, क्योंकि ये दस्तावेज सीधे तौर पर कमलनाथ की कथित भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

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कांग्रेस और गांधी परिवार पर तीखा हमला

अदालत में पक्ष रखने के साथ ही सिरसा ने राजनीतिक मोर्चे पर भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया:

  • पदों पर बिठाने पर सवाल: सिरसा ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कमलनाथ को केंद्रीय मंत्री और बाद में मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया।
  • माफी की मांग: उन्होंने सवाल उठाया कि गांधी परिवार ऐसे आरोपों से घिरे नेता के साथ क्यों खड़ा रहा? इसके साथ ही उन्होंने 1984 की हिंसा से प्रभावित पीड़ित सिख परिवारों से कांग्रेस से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की।

'समय बीतने से पीड़ितों का दर्द कम नहीं होता'

हाईकोर्ट के बाहर संवाददाताओं और मीडिया से बात करते हुए मंत्री सिरसा ने भावुक और कड़ा संदेश दिया:

"यह लड़ाई उन बेगुनाह परिवारों को न्याय और जवाबदेही दिलाने की है, जो पिछले चार दशकों से इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। समय बीत जाने से पीड़ितों का दर्द खत्म नहीं होता, और न ही कोई राजनीतिक पद पर बैठा व्यक्ति कानून से ऊपर हो सकता है। मुझे देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।"

सिरसा ने उम्मीद जताई है कि 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई में इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुँचाया जाएगा।

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