पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प को लेकर एक बड़ा संकल्प दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगले दो वर्षों के भीतर बिहार के सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक स्तर इस मुकाम पर पहुंचाया जाएगा कि विधायकों, मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बच्चों का दाखिला इन स्कूलों में कराना पड़ेगा। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि आगामी 15 अगस्त से राज्य के गरीब विद्यार्थियों को देर रात में भी सवाल हल करने के लिए ऑनलाइन 'लाइव टीचर' की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
"2 साल में बदल जाएगा शिक्षा का स्वरूप"
पटना में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि शिक्षा का सही केंद्र तभी माना जाएगा जब समाज के हर वर्ग और प्रशासनिक वर्ग के बच्चे एक साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे:
- मंत्रियों व अफसरों के बच्चों का दाखिला: सीएम ने कहा, "अगले दो वर्षों में यह तय कीजिए कि मंत्री, विधायक और जिले के बड़े अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेने लगें। जब यह संभव होगा, तभी मैं मानूंगा कि बिहार में शिक्षा का असली बदलाव हुआ है।"
- NEET और JEE की तैयारी: उन्होंने बताया कि राज्य के मॉडल सरकारी स्कूलों में ही अब छात्र-छात्राओं को नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी।
15 अगस्त से शुरू होगी 'लाइव टीचर' सेवा
गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को पढ़ाई में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
"यदि गरीब का बच्चा सक्षम होता तो वह कॉन्वेंट या बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता। अगर रात के 11 बजे कोई छात्र गणित के किसी कठिन सवाल में अटक जाए, तो उसकी चिंता सरकार करेगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) को निर्देश दिए गए हैं कि 15 अगस्त से ऐसी व्यवस्था लागू की जाए, जिससे छात्र अपने मोबाइल या लैपटॉप के जरिए रात 11 बजे भी लाइव टीचर से सीधे मदद ले सकें।"
मदरसा, संस्कृत और राष्ट्रवादी शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा में संतुलन और सामाजिक समरसता को लेकर सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट किया:
| विषयसरकार का रुख व योजना | |
| संस्कृत एवं मदरसा शिक्षा | सरकार जितना ध्यान मदरसों पर देती है, संस्कृत विद्यालयों पर भी उतना ही ध्यान दिया जाएगा। आबादी और आवश्यकता के अनुसार संसाधनों का आवंटन होगा। |
| किशनगंज व उर्दू स्कूल | किशनगंज जैसे बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों की मांग के अनुरूप उर्दू स्कूल खोले जाएंगे, लेकिन शिक्षा में राष्ट्रवाद और राष्ट्र सेवा की भावना सर्वोपरि रहेगी। |
| जातिवाद का अंत | संत रविदास के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए बिहार में पूरी तरह जातिवाद को समाप्त कर शिक्षा के माध्यम से राज्य को समृद्ध बनाया जाएगा। |
उल्लेखनीय है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में कई अत्याधुनिक 'मॉडल स्कूल' विकसित किए जा रहे हैं, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ अध्यापन की गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम हो रहा है।





