बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में शराबबंदी की नीति को लेकर सरकार का रुख एक बार फिर पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू रहेगी और सरकार इस फैसले से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने इसे केवल आर्थिक नजरिये से देखने के बजाय 'आधी आबादी' (महिलाओं) के सम्मान और सामाजिक बदलाव से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया है।
मुख्यमंत्री के साक्षात्कार और घोषणाओं के मुख्य बिंदु:
- ₹20,000 करोड़ का नुकसान मंजूर, नीति नहीं बदलेगी: शराबबंदी के कारण राज्य सरकार को हर साल लगभग ₹20,000 करोड़ के राजस्व का घाटा सहना पड़ रहा है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के आग्रह पर लागू की गई इस नीति में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
- 2030 तक पलायन रोकने का लक्ष्य: बिहार से युवाओं के पलायन पर बोलते हुए सीएम ने दावा किया कि 2030 से पहले राज्य में शिक्षा और रोजगार के ऐसे अवसर निर्मित कर दिए जाएंगे, जिससे पलायन पूरी तरह थम जाएगा।
- बाढ़ नियंत्रण के लिए हाई-लेवल डैम: नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए हाई-लेवल डैम की डीपीआर (DPR) पर सहमति बन चुकी है। वर्तमान में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 20,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर सामुदायिक रसोई चलाई जा रही है।
- फरक्का बराज पर सवाल: फरक्का बराज के कारण गंगा नदी में जमा हो रही गाद को बिहार के लिए नुकसानदायक बताते हुए मुख्यमंत्री ने बक्सर से लेकर भागलपुर तक नदी की बढ़ती चौड़ाई पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मांग की कि फरक्का जल संधि के तहत बिहार को जरूरत के हिसाब से पानी लेने का अधिकार मिले।
- नीतीश कुमार को बताया पितातुल्य: पिछले 30 वर्षों से राजनीतिक क्षेत्र में साथ काम करने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार को अपना पितातुल्य बताया।
शराबबंदी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार अपने सामाजिक सुधार के एजेंडे पर मजबूती से कायम रहेगी।





