देश के 100 सबसे पिछड़े कृषि जिलों में बीते तीन महीनों के दौरान खेती-किसानी की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। 2 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) की समीक्षा बैठक की।
समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत चयनित जिलों का औसत प्रगति स्कोर मात्र तीन महीनों (अप्रैल 2026 से जुलाई 2026) के भीतर 22.54 अंक से लगभग दोगुना होकर 38.85 अंक तक पहुंच गया है।
इन मुख्य क्षेत्रों में दर्ज किया गया सबसे बड़ा सुधार
योजना की प्रगति को मापने के लिए 121 संकेतक (74 आउटपुट और 47 आउटकम) तय किए गए हैं। समीक्षा के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई:
| प्रमुख क्षेत्रअप्रैल 2026 स्कोरजुलाई 2026 स्कोर | ||
| कृषि उत्पादकता (Agricultural Productivity) | 2.53 | 6.70 |
| फसल विविधीकरण (Crop Diversification) | 5.60 | 8.65 |
| कृषि साख तक पहुंच (Credit Access) | 2.81 | 5.59 |
| सिंचाई ढांचा (Irrigation Infrastructure) | 1.65 | 4.20 |
| प्रशासनिक सेवा वितरण (Service Delivery) | 7.94 | 10.33 |
| कटाई के बाद भंडारण (Post-harvest Storage) | 2.61 | 3.82 |
सघन प्रशिक्षण और प्राकृतिक खेती पर जोर
बैठक में जानकारी दी गई कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 6,90,530 किसानों और 88,961 विस्तार कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें से 2,20,683 से अधिक किसानों और कृषि कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
किसानों और कृषि-कारोबार के लिए इसके मायने
- एकल खिड़की समाधान: कम उत्पादकता और कमजोर साख वाले इन 100 जिलों में 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है। इससे मिट्टी परीक्षण, सिंचाई उपकरण, बीज और लोन जैसी सुविधाओं के लिए किसानों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
- कारोबार और बाज़ार को बढ़ावा: आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तर्ज पर अक्टूबर 2025 में लागू हुई इस योजना से किसानों की क्रय शक्ति बढ़ रही है। फलस्वरूप, इन जिलों में बीज, उर्वरक, सिंचाई तंत्र और कृषि उपकरणों की मांग में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यों को योजनाओं के अभिसरण (convergence) में और तेजी लाने के निर्देश दिए हैं, ताकि इन पिछड़े जिलों को राष्ट्रीय कृषि औसत के समकक्ष लाया जा सके।





