चंडीगढ़: केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्रीय सेवा नियम (Central Service Rules) लागू होने के बाद से प्रशासन में पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों पुराने 60:40 के आईएएस अनुपात का संतुलन डगमगा गया है, जिससे भविष्य में राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद गहराने की संभावना प्रबल हो गई है।
यूटी कैडर का 'दबदबा', प्रतिनियुक्ति वाले अफसर हुए कम
चंडीगढ़ प्रशासन में हाल ही में यूटी कैडर के नए आईएएस अधिकारी डी. कार्तिकेयन की ज्वाइनिंग के साथ ही अब इस कैडर के अधिकारियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। इसके उलट, ऐतिहासिक रूप से शहर के प्रशासन में अहम भूमिका निभाने वाले पंजाब और हरियाणा के अब मात्र दो-दो आईएएस अधिकारी ही शेष बचे हैं।
अधिकारी डी. कार्तिकेयन को आईटी, विजिलेंस और हाउसिंग बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि पहले आईटी विभाग का प्रभार हरियाणा कैडर के गृह सचिव और हाउसिंग बोर्ड के सीईओ का पद पंजाब कैडर के पास सुरक्षित रहता था।
प्रमुख विभागों से राज्यों का 'कब्जा' खत्म
प्रशासनिक फेरबदल के बाद पंजाब और हरियाणा की पकड़ कई अहम विभागों से ढीली पड़ गई है:
शिक्षा विभाग: पहले पंजाब कैडर के वित्त सचिव इस विभाग को संभालते थे, लेकिन वर्तमान में यह यूटी कैडर की आईएएस प्रेरणा पुरी के पास है।
आईटी और हाउसिंग: इन पदों पर भी अब यूटी कैडर का नियंत्रण हो गया है।
पैनल खारिज होना: हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के चार आईएएस अधिकारियों के पैनल को नकारा जाना इस बात का संकेत है कि अब प्रतिनियुक्ति (Deputation) के बजाय यूटी कैडर को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रशासनिक फेरबदल और वर्तमान स्थिति
वीरवार को हुए बदलावों में जहाँ अभिजीत विजय चौधरी को रिलीव किया गया, वहीं डॉ. पालिका को उच्चतर शिक्षा विभाग का नया निदेशक नियुक्त किया गया है।
वर्तमान अधिकारी सूची:
यूटी कैडर (8): राजेश प्रताप सिंह (मुख्य सचिव), स्वप्निल एम. नाइक, प्रेरणा पुरी, मोहम्मद मंसूर, डॉ. सैयद आबिद राशिद शाह, अनुराधा चगती, डी. कार्तिकेयन।
हरियाणा कैडर (2): मंदीप सिंह बराड़ (होम सेक्रेटरी), निशांत कुमार यादव (डीसीबी)।
पंजाब कैडर (2): दीप्रा लाकड़ा (फाइनेंस सेक्रेटरी), अमित कुमार (निगम कमिश्नर)।
निष्कर्ष: चंडीगढ़ प्रशासन में यूटी कैडर के बढ़ते दखल ने पंजाब और हरियाणा की सरकारों के लिए चिंता बढ़ा दी है। जिस 60:40 के फार्मूले को चंडीगढ़ के अस्तित्व का आधार माना जाता रहा है, उसका कमजोर होना आने वाले दिनों में केंद्र और राज्यों के बीच टकराव का नया मुद्दा बन सकता है।





