रानियां/सिरसा। हरियाणा में नशा अब केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक जानलेवा महामारी का रूप ले चुका है। सिरसा जिले के रानियां क्षेत्र का गांव ओटू आज एक ऐसे काले सच का गवाह बना है, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। यहाँ नशे की लत इस कदर हावी हो चुकी है कि युवा नशा करने के लिए पानी न मिलने पर अपने ही शरीर से खून निकालकर उसमें गोलियां घोलकर इंजेक्शन लगा रहे हैं।
खौफनाक हकीकत: खून बना नशे का घोल
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और ढाणी प्रताप के सरपंच प्रतिनिधि सुनील कुमार के अनुसार, गांव के श्मशान घाट और सुनसान इलाकों में युवाओं की स्थिति मानसिक विक्षिप्तों जैसी हो गई है। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन लगाने के लिए जब युवाओं को पानी नहीं मिलता, तो वे अपनी नसों से खून निकालते हैं, उसमें 'गुलाबी गोलियां' (मेडिकल नशा) मिलाते हैं और फिर उसी जहरीले मिश्रण को वापस अपने शरीर में उतार लेते हैं।
श्मशान घाट में बिछ रही हैं जवान लाशें
ओटू गांव के ग्रामीणों ने जो आंकड़े साझा किए हैं, वे प्रशासन की नींद उड़ाने वाले हैं:
35 से अधिक मौतें: कोविड-19 के बाद से अब तक गांव के 35 से ज्यादा युवा अपनी जान गंवा चुके हैं।
उम्र महज 16 से 25 वर्ष: जान गंवाने वाले अधिकांश युवाओं की उम्र अपनी जिंदगी शुरू करने की थी।
ताजा मामला: बीते 23-24 अक्टूबर को एक ही दिन में दो युवकों—सुखचैन (20) और विक्की (19)—की ओवरडोज से मौत हो गई।
एक दादा का दर्द: "एक पोता मरा, दूसरा नशामुक्ति केंद्र में"
85 वर्षीय बुजुर्ग मुख्तियार की कहानी इस तबाही का चेहरा है। उन्होंने रोते हुए बताया कि उनके 19 साल के पोते की मौत इंजेक्शन हाथ में लगे हुए ही हो गई। उसे बचाने के लिए परिवार ने मजदूरी कर 4.50 लाख रुपये खर्च किए, लेकिन नाकाम रहे। अब उनका बड़ा पोता राजस्थान के एक नशामुक्ति केंद्र में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
सिस्टम की लापरवाही: खेल मैदान की जगह बना 'कूड़ाघर'
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए 2017-18 में जिस खेल मैदान की घोषणा की गई थी, वह 9 साल बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल सका। जिस जमीन पर स्टेडियम बनना था, वहां आज गांव का कूड़ा फेंका जा रहा है। हालांकि, सीईओ डॉ. सुभाष का कहना है कि काम 'प्रक्रियाधीन' है।
राजनीतिक गलियारों में गूंज
रानियां के विधायक अर्जुन चौटाला ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने मांग की है कि:
'चिट्टा' बेचने वाले तस्करों और माफियाओं पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो।
सरकारी नशामुक्ति केंद्रों की स्थिति सुधारी जाए।
जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटियों का गठन कर नशा तस्करों की चेन तोड़ी जाए।
निष्कर्ष: ओटू गांव की यह स्थिति चेतावनी है कि यदि आज ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।





