पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को उस वक्त मर्यादा की सीमाएं लांघ गया, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के दो दिग्गज नेता व्यक्तिगत हमले पर उतर आए। उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के बीच हुई यह जुबानी जंग अब तक की सबसे तीखी बहसों में से एक मानी जा रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा होने लगी है तथा राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि बंगाल की राजनीति में 'पिता' जैसे सम्मानजनक रिश्ते को विवादों में घसीटना यह दर्शाता है कि अब राजनीतिक बहस का स्तर कितना व्यक्तिगत हो चुका है।

विवाद की शुरुआत: 'चोर' संबोधन पर बवाल

बजट पर चर्चा के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने उदयन गुहा को उकसाते हुए दावा किया कि उदयन ने खुद अपने पिता (दिवंगत दिग्गज नेता कमल गुहा) को 'चोर' कहा था। यह सुनते ही सदन में शोर मच गया।

उदयन गुहा ने पलटवार करते हुए चुनौती दी, "मेरे पिता 7 बार विधायक और 19 साल मंत्री रहे। मैंने उनकी राजनीति की आलोचना की होगी, लेकिन सुवेंदु यह साबित करें कि मैंने उन्हें चोर कब कहा।"

उदयन का 'पुत्र' कार्ड: "आप असल में किसके बेटे हैं?"

उदयन गुहा यहीं नहीं रुके, उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर अधिकारी का नाम घसीटते हुए सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा:

"आप शिशिर बाबू के बेटे हैं, लेकिन खुद को 'मोदी का पुत्र' बताते हैं। जनता को बताइए कि आप असल में किसके बेटे हैं?"

इस टिप्पणी के बाद सदन में जबरदस्त नारेबाजी शुरू हो गई और दोनों पक्षों के विधायक आमने-सामने आ गए।

स्पीकर का 'कैंची' एक्शन

विधानसभा की गरिमा को तार-तार होते देख अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने इसे 'अभूतपूर्व और दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कड़ा फैसला लिया:

रिकॉर्ड से बाहर: इस पूरे विवाद और पिता को लेकर की गई टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।

सख्ती: स्पीकर ने दोनों नेताओं को शांत कराते हुए दोबारा बजट पर ध्यान केंद्रित करने की हिदायत दी।