मुंगेर (बिहार)। बिहार में पंचायतों को सिर्फ एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता के आधुनिक केंद्र के रूप में बदलने का राज्य सरकार का विजन अब धरातल पर उतरने लगा है। मुंगेर जिले के तारापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत टेटिया बंबर प्रखंड की 'भुना पंचायत' इसकी सबसे बड़ी और खूबसूरत मिसाल बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 28 जून को भुना पंचायत में नवनिर्मित अत्याधुनिक 'पंचायत सरकार भवन' का भव्य उद्घाटन किया। यह भवन अब जिले का पहला ऐसा हाईटेक और स्मार्ट पंचायत केंद्र बन गया है, जहां ग्रामीणों की रोजमर्रा से जुड़ी तमाम जरूरी सरकारी सेवाएं और सहूलियतें एक ही छत के नीचे लाकर खड़ी कर दी गई हैं।

गांव की बदली तस्वीर: पिछड़ेपन से 'हाईटेक' युग की शुरुआत

कभी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने वाली और पिछड़े पंचायतों की श्रेणी में गिनी जाने वाली भुना पंचायत अब स्मार्ट पंचायत बनने की राह पर तेजी से कदम बढ़ा चुकी है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस नए पंचायत सरकार भवन में सिर्फ प्रशासनिक काम ही नहीं होंगे, बल्कि ग्रामीणों के जीवन को सुगम बनाने के लिए कई जन-सुविधाएं तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई हैं:

बैंकिंग सेवा: अब पैसों के लेन-देन के लिए ग्रामीणों को दूर नहीं जाना होगा।

डाकघर (Post Office): डाक और बचत से जुड़ी सुविधाएं परिसर में ही उपलब्ध हैं।

डिजिटल क्रेडेंशियल्स: विभिन्न प्रकार के सरकारी प्रमाण पत्रों (जाति, आवासीय, आय आदि) का निर्माण कार्य अब यहीं से होगा।

राजस्व कार्यालय: जमीन और लगान से जुड़े मामलों के निष्पादन के लिए राजस्व अधिकारी (कर्मचारी) नियमित रूप से यहां मौजूद रहेंगे।

10 हजार की आबादी को मिली बड़ी राहत, समय और पैसे की होगी बचत

भुना पंचायत की लगभग 10 हजार की आबादी के लिए यह भवन किसी सौगात से कम नहीं है। पहले यहां के ग्रामीणों को छोटे से छोटे कागजी काम या प्रमाण पत्र के लिए टेटिया बंबर प्रखंड कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें ग्रामीणों का पूरा दिन खराब होता था और आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता था।

अब गांव के भीतर ही सारी सुविधाएं मिल जाने से ग्रामीणों में भारी उत्साह है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार के इस सराहनीय कदम से अब उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाएगी और गांव में विकास की एक नई सुबह होगी।

प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और सशक्तिकरण की मिसाल बिहार सरकार सूबे की सभी पंचायतों को डिजिटल और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। भुना पंचायत का यह मॉडल केवल एक कंक्रीट के भवन का निर्माण नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को इतना मजबूत और पारदर्शी बनाने की कोशिश है कि अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी सीधे सरकार की योजनाओं से जुड़ सके। यह कदम बिहार के ग्रामीण इलाकों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।