मोहाली/खरड़: कनाडा से भारत आकर दांतों का इलाज कराना एक एनआरआई परिवार के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन गया। मोहाली के खरड़ स्थित एक निजी अस्पताल में डेंटल इम्प्लांट की प्रक्रिया के दौरान 42 वर्षीय एनआरआई महिला अमृता बेदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक महिला की मां अन्नपूर्णा साही ने मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को लिखित शिकायत देकर संबंधित डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधन और एनेस्थीसियोलॉजिस्ट पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
कनाडा से तय हुआ था पूरा इलाज
कनाडा के कैलगरी की रहने वाली अमृता बेदी अपने दांतों के इलाज के लिए अपने माता-पिता और 10 वर्षीय बेटी के साथ भारत आई थीं। शिकायत के अनुसार, जनवरी महीने में ही परिवार ने वॉट्सएप पर एक्स-रे रिपोर्ट और तस्वीरें साझा कर खरड़ के डॉक्टर से संपर्क किया था। डॉक्टरों को पहले ही बता दिया गया था कि वे सीमित समय के लिए भारत आ रहे हैं। 11 मई को भारत पहुंचने के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके लिए अस्पताल को एडवांस के रूप में कैश और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7.59 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया था।
14 मई की दोपहर क्या हुआ?
परिजनों के मुताबिक, 14 मई को अमृता का डेंटल इम्प्लांट होना तय था। सुबह उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोपहर करीब 4 बजे डॉक्टर प्रतिमा दुग्गल का फोन आया और परिवार को तुरंत अस्पताल बुलाया गया।
अमृता की मां ने आरोप लगाया:
"जब हम अस्पताल पहुंचे, तो अमृता बेहोश पड़ी थी। कमरे में कई लोग मौजूद थे, लेकिन कोई प्रभावी आपातकालीन इलाज नहीं चल रहा था। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज रिस्पॉन्ड नहीं कर रही है, जिसके बाद एक व्यक्ति ने अचानक उसकी छाती को दबाना (सीपीआर देना) शुरू किया।"
दवा और रेफरल प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
शिकायत में अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं:
हाई-रिस्क दवा का इस्तेमाल: परिवार का दावा है कि प्रक्रिया के दौरान अमृता को 'अट्राक्यूरियम' (Atracurium) नामक दवा दी गई, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर केवल प्रशिक्षित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की देखरेख में और सुसज्जित ऑपरेशन थिएटर में ही किया जाता है।
रेफर करने में देरी: परिजनों का आरोप है कि स्थिति बिगड़ने के बावजूद अस्पताल ने मरीज को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ रेफर नहीं किया। करीब 25 मिनट की देरी के बाद उसे एम्बुलेंस से पीजीआई भेजा गया।
मौके से भागे डॉक्टर: पीजीआई पहुंचने पर डॉक्टरों ने पाया कि अमृता का बीपी, पल्स और ऑक्सीजन लेवल रिकॉर्ड नहीं हो रहा था और ईसीजी पूरी तरह फ्लैट थी, जिसके बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। आरोप है कि मौत की पुष्टि होते ही मोहाली अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर पीजीआई से चुपचाप खिसक गए।
कड़े एक्शन और मेडिकल बोर्ड से जांच की मांग
पीड़ित मां अन्नपूर्णा साही ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्षता के लिए तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, इस्तेमाल की गई दवाएं और एनेस्थीसिया उपकरण जब्त किए जाएं। परिवार ने मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के विशेष मेडिकल बोर्ड से कराने और विसरा जांच की मांग भी उठाई है ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके।





