कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नवगठित भाजपा सरकार ने प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। ताजा घटनाक्रम में, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और उनका मंत्रिमंडल राज्य भर में संचालित हो रहे गैर-सरकारी और कथित तौर पर अवैध मदरसों के खिलाफ एक बड़े कानूनी अभियान की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी की जा सकती है। सरकार के इन कदमों और पार्टी विधायकों के बयानों ने राज्य के सियासी पारे को बढ़ा दिया है।

"हम मदरसे के खिलाफ नहीं, विरोध अवैध संस्थानों से है"

इस आगामी कार्रवाई को भाजपा के चुनावी एजेंडे का हिस्सा बताते हुए पार्टी विधायक सजल घोष ने सरकार के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा:

"यह किसी समुदाय विशेष या मुस्लिम समाज के खिलाफ अभियान नहीं है। सच यह है कि हमें मदरसे से डॉक्टर या इंजीनियर नहीं मिलते। हमारा विरोध मदरसों से नहीं, बल्कि बिना सहायता प्राप्त और अवैध रूप से चल रहे संस्थानों से है। राज्य में ऐसे सभी अवैध संस्थानों को बंद किया जाएगा।"

सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज को लेकर कड़े निर्देश

मदरसों के अलावा, राज्य सरकार सड़कों और खुले सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली नमाज को लेकर भी सख्त नीति बनाने जा रही है। भाजपा विधायक अर्जुन सिंह ने कैबिनेट बैठक के हवाले से बताया कि मुख्यमंत्री ने इस विषय पर कड़े निर्देश जारी किए हैं।

मस्जिदों में पढ़ें नमाज: अर्जुन सिंह ने कहा कि लोग मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ें, लेकिन सड़कों पर नमाज बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोलकाता के रेड रोड इलाके में अब पहले जैसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी।

सेना के प्रशिक्षण का हवाला: उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि रेड रोड पर होने वाले सार्वजनिक जमावड़ों के कारण सेना (रक्षा मंत्रालय) के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित होते थे और प्रशासनिक दिक्कतें आती थीं।

विवादों में विधायक रितेश तिवारी का बयान: "जिन्होंने वोट दिया, काम उन्हीं का होगा"

इस प्रशासनिक हलचल के बीच, कोलकाता के काशीपुर-बेलगाछिया निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा विधायक रितेश तिवारी का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

एक जनसभा को संबोधित करते हुए रितेश तिवारी ने कहा:

"लगभग 74 सालों के चुनावी इतिहास में, मैं इस क्षेत्र का पहला ऐसा उम्मीदवार हूं जिसे एक भी मुस्लिम वोट नहीं मिला। बाबा भोलेनाथ को साक्षी मानकर मैं कहता हूं कि आने वाले पांच सालों में मैं उनके लिए कोई काम नहीं करूंगा और न ही कोई प्रमाण पत्र जारी करूंगा। मैं सभी का विधायक हूं, लेकिन प्राथमिकता उन्हें दूंगा जिन्होंने मुझे वोट देकर जिताया है।"

जब मीडिया ने उनके इस बयान पर सवाल किया, तो उन्होंने दोटूक कहा कि वह अपनी बात पर पूरी तरह कायम हैं और अगर इसे तुष्टीकरण के खिलाफ राजनीति कहा जाता है, तो वह इसे शत-प्रतिशत करेंगे।

अधिसूचना का इंतजार, विपक्ष ने साधा निशाना

हालांकि, अवैध मदरसों और सार्वजनिक नमाज को लेकर सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी नहीं की गई है, लेकिन भाजपा विधायकों के इन तीखे तेवरों ने राज्य में सामाजिक और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। जहां सत्तापक्ष इसे कानून-व्यवस्था और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।