कुलगाम (दक्षिण कश्मीर) जम्मू-कश्मीर को ड्रग्स के जाल से पूरी तरह मुक्त करने के लिए प्रशासन ने अपनी ताकत झोंक दी है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम स्थित लारू बस स्टैंड पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान को एक जन-आंदोलन घोषित किया। खुद को "आपके परिवार का सदस्य" बताते हुए उपराज्यपाल ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन इस लड़ाई में जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान अब सिर्फ सरकारी या पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें परिवार, युवा, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक नेता और नागरिक समाज सक्रिय रूप से जुड़ चुके हैं।
50 दिनों का 'एक्शन रिपोर्ट कार्ड': टूट रही है तस्करों की कमर
मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क पर पिछले 51 दिनों में की गई बड़ी कार्रवाई का ब्योरा देते हुए उपराज्यपाल ने कड़े आंकड़े साझा किए:
| कार्रवाई का प्रकार | कुल संख्या / स्टेटस |
|---|---|
| दर्ज की गई FIR | 923 |
| गिरफ्तार ड्रग तस्कर | 1000 से अधिक |
| एहतियातन हिरासत में बड़े तस्कर | 56 से ज्यादा |
| निलंबित ड्राइविंग लाइसेंस | 600+ |
| पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया | 124 मामलों में जारी |
"ड्रग तस्करों के खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई एक कठिन और सतत प्रक्रिया है। जब तक राज्य में एक भी ड्रग गिरोह मौजूद है, यह अभियान पूरे जोर-शोर से जारी रहेगा।" - मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल
"युवा अपराधी नहीं, पीड़ित हैं" — संवेदनशीलता और पुनर्वास पर जोर
भटके हुए युवाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उपराज्यपाल ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि नशे की लत का शिकार हुए युवाओं को अपराधी नहीं समझा जाना चाहिए। वे वास्तविक पीड़ित हैं, जिन्हें समाज के सम्मान, संवेदना और पुनर्वास की जरूरत है।
इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उन्होंने घोषणा की:
आधुनिक नशामुक्ति केंद्र: जम्मू-कश्मीर के हर जिले में जल्द ही अत्याधुनिक नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र खोले जाएंगे।
नई पुनर्वास नीति: देश भर के शीर्ष विशेषज्ञों से सलाह मशविरा करके एक प्रभावी पुनर्वास नीति तैयार की गई है, जिसे जल्द ही पूरी तरह लागू किया जाएगा।
आतंकवाद के बाद अब नशे की परछाई हटाने का संकल्प
अतीत का जिक्र करते हुए मनोज सिन्हा ने कहा, "जम्मू-कश्मीर ने दशकों तक आतंकवाद का दंश झेला है। अब नशा हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक नया खतरा बनकर उभरा है। लेकिन हमने आतंकवाद और नशे, दोनों की परछाइयों को राज्य से हटाने का संकल्प लिया है। आज जम्मू-कश्मीर की युवा पीढ़ी को जकड़ने वाली नशे की बेड़ियां टूट रही हैं।"
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में शुरू किए गए 'नशा मुक्त भारत अभियान' के बाद से, 2021 से जम्मू-कश्मीर में इन प्रयासों को और तेज कर दिया गया है।
100 दिन का लक्ष्य: जमीनी स्तर पर जागरूकता
उपराज्यपाल ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए स्वीकार किया कि दशकों पुरानी इस समस्या को महज 100 दिनों में पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। लेकिन इस 100-दिवसीय विशेष अभियान का असली मकसद समाज में जागरूकता पैदा करना और सामूहिक संकल्प को मजबूत करना है।
उन्होंने इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन, महिला समितियों, युवा क्लबों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जमकर सराहना की और इसे नए जम्मू-कश्मीर के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।





