आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रमुख AI कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) की नवीनतम रिसर्च में यह बात साबित हुई है कि AI मॉडल अब बिना इंसानी मदद के दूसरे AI मॉडल्स को ट्रेनिंग देकर ज्यादा सुरक्षित, बेहतर और स्मार्ट बना सकते हैं। तकनीकी जगत में खुद को अपग्रेड करने की इस क्षमता (Recursive Self-Improvement) को AGI यानी इंसानी दिमाग जैसे आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस तक पहुंचने का सबसे अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।
एंथ्रोपिक की रिसर्च में क्या आया सामने?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एंथ्रोपिक के फेलो प्रोग्राम रिसर्चर चेन यूह-हान द्वारा पब्लिश रिसर्च पेपर (Automated Researchers Can Reliably Mitigate Alignment Failures) में Claude Opus 4.8 पर आधारित ऑटोमेटेड अलाइनमेंट रिसर्चर्स तैयार किए गए।
- 10 बेंचमार्क पर सुधार: इन AI रिसर्चर्स को AI मॉडल्स के 10 अलग-अलग अलाइनमेंट और सेफ्टी संबंधित सुधारों की जिम्मेदारी दी गई।
- सफल नतीजे: AI ने टारगेट मॉडल की मूल परफॉर्मेंस और क्षमता में बिना कोई गिरावट लाए सभी 10 बेंचमार्क में सफलतापूर्वक सुधार दर्ज किया।
इंसानी वैज्ञानिकों से तेज़, बेहतर और बेहद किफायती
रिसर्च के दौरान AI रिसर्चर्स ने लिटरेचर सर्च करने से लेकर ट्रेनिंग के नए तरीके डिजाइन किए और एनवीडिया H200 (NVIDIA H200) GPU पर टारगेट मॉडल्स को खुद ट्रेन किया:
- तेज़ ट्रेनिंग: बेस्ट AI रिसर्चर ने अनुभवी इंसानी वैज्ञानिकों की तुलना में औसतन महज 6 घंटे के भीतर बेहतर ट्रेनिंग मेथड तैयार कर लिया।
- कम लागत: जहां एक अनुभवी इंसानी रिसर्चर पर लगभग $150 (डॉलर) प्रति घंटे का खर्च आता है, वहीं इस AI रिसर्चर का खर्च सिर्फ $4 प्रति घंटा रहा।
AGI के कितना करीब पहुंची दुनिया?
यह रिसर्च ऐसे समय पर सामने आई है जब OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और चीफ रिसर्च ऑफिसर मार्क चेन भी AGI तक पहुंचने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, एंथ्रोपिक की रिसर्च में यह भी स्पष्ट किया गया है कि AI फिलहाल इंसानी वैज्ञानिकों को पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर सकता।
AI रिसर्चर अभी भी केवल इंसानों द्वारा तय किए गए बेंचमार्क पर ही काम कर पाता है। नए रिसर्च विजन तैयार करने, सही लक्ष्य निर्धारित करने और AI सिस्टम की नैतिक सीमाएं तय करने के लिए इंसानी दिमाग और गाइडेंस की जरूरत हमेशा बनी रहेगी।





