नई दिल्ली: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) को बूस्ट देने और आम यात्रियों की जेब का बोझ कम करने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन पर लगने वाले वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) को 25% से सीधे घटाकर 7% करने का निर्णय लिया है।
पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण जहां दुनिया भर में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दिल्ली सरकार का यह कदम राजधानी से उड़ान भरने वाले यात्रियों के लिए हवाई टिकटों की कीमतों को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा।
शुरुआती 6 महीने के लिए लागू होंगी नई दरें
दिल्ली सरकार के मुताबिक, वैट की दरों में की गई यह कटौती प्रारंभिक तौर पर 6 महीने की अवधि के लिए लागू की जाएगी। दिल्ली में हवाई ईंधन पर ऊंचा वैट सालों से एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। इसी वजह से आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट पर उड़ानों की संचालन लागत बढ़ रही थी और टिकट महंगे हो रहे थे।
क्या पड़ेगा असर?
विमानन कंपनियों के कुल ऑपरेटिंग खर्च (संचालन लागत) में हवाई ईंधन (ATF) का हिस्सा सबसे बड़ा होता है, जो लगभग 35% से 40% तक बैठता है। वैट में 18% की इस भारी कटौती से कंपनियों की लागत में बड़ी कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को सस्ते किराए के रूप में मिल सकता है।
केंद्र सरकार की अपील पर मुहर, बढ़ेगा कॉम्पटीशन
गौरतलब है कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय लंबे समय से सभी राज्यों से ATF पर VAT कम करने की अपील कर रहा था। केंद्र का मानना था कि वैश्विक संकट के दौर में एयरलाइंस पर टैक्स का दबाव कम होना चाहिए ताकि घरेलू एविएशन नेटवर्क स्थिर रहे।
| राज्य स्तर पर VAT की स्थिति | प्रभाव |
|---|---|
| विभिन्न राज्यों में वैट दरें | 4% से लेकर 30% तक |
| महाराष्ट्र का पिछला अनुभव | टैक्स कटने के बाद उड़ानों की संख्या और एयरलाइंस का मुनाफा बढ़ा |
| दिल्ली सरकार का नया कदम | पड़ोसी राज्यों की तुलना में दिल्ली एयरपोर्ट की प्रतिस्पर्धा (Competition) बढ़ेगी |
दिल्ली बनेगा मजबूत एविएशन हब
एयरलाइन इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का पुरजोर स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से न सिर्फ एयरलाइंस को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि दिल्ली एक प्रमुख एविएशन हब के तौर पर अपनी चमक बरकरार रख पाएगा। हाल के दिनों में हवाई टिकट महंगे होने के कारण एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की संख्या में जो गिरावट देखी जा रही थी, अब इस फैसले के बाद उसमें भारी उछाल आने की उम्मीद है।





