प्रयागराज: श्री विद्यामठ के बटुकों के यौन शोषण के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर आज, शुक्रवार 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। कोर्ट नंबर 72 में सूचीबद्ध इस मामले में आज पुलिस द्वारा कथित पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी, जो इस केस की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।

"हम अपना काम करेंगे, कोर्ट अपना": अविमुक्तेश्वरानंद

सुनवाई से ठीक पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने संयमित लहजे में कहा:

"न्यायालय के सामने अधिवक्ता मौजूद हैं। सबको अपनी बात कहने का अधिकार है और लोग अपनी बात कहेंगे। बाकी सब न्यायालय के विवेक पर निर्भर है। स्वाभाविक है कि हम अपना काम करेंगे और वे अपना।"

सीलबंद रिपोर्ट और पॉक्सो एक्ट का मामला

सहायक पुलिस आयुक्त (झूंसी) विमल किशोर मिश्रा के अनुसार, कथित पीड़ित बटुकों का मेडिकल परीक्षण पूरा हो चुका है। जांच अधिकारी को सौंपी गई यह रिपोर्ट बेहद गोपनीय रखी गई है और इसे सीधे अदालत के समक्ष ही खोला जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि:

21 फरवरी: आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने झूंसी थाने को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

गंभीर आरोप: एक बटुक ने सार्वजनिक रूप से स्वामी और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर यौन शोषण और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।

तकरार: शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने बुधवार को पीड़ितों को मीडिया के सामने पेश किया, जिसके बाद से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'अपराधी' करार दिया है। स्वामी का दावा है कि वादी पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

दूसरी ओर, आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए चुनौती दी है कि "स्वामी जी किसी भी थाने या कोर्ट से ऐसा कोई प्रमाण लेकर आएं जो मुझे अपराधी सिद्ध करता हो।"

क्या है कानूनी स्थिति?

चूंकि मामला पॉक्सो एक्ट से जुड़ा है, इसलिए कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल रिपोर्ट की सामग्री अग्रिम जमानत मिलने या न मिलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। यदि रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि होती है, तो स्वामी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।