सागर (दक्षिण 24 परगना) | पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराने के चुनाव आयोग के दावों को आज सुबह उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब दक्षिण 24 परगना के सागर इलाके में भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर जानलेवा हमला किया गया। यह घटना मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के उस आश्वासन के महज 24 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने बंगाल को 'हिंसा मुक्त और भय मुक्त' चुनाव का भरोसा दिया था।
वारदात: सीने में लगी गोली, हालत नाजुक
66 वर्षीय भाजपा नेता त्रिलोकेश्वर ढाली बुधवार सुबह श्रीधाम और गंगासागर बस स्टैंड के बीच से गुजर रहे थे, तभी बाइक सवार दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
हमला: गोली ढाली के सीने में लगी।
उपचार: स्थानीय निवासियों ने उन्हें तुरंत सागर ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए कोलकाता के पास जोका स्थित अस्पताल में रेफर कर दिया गया है।
त्रिलोकेश्वर ढाली मथुरापुर इकाई के पूर्व सचिव हैं और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
घटना के तुरंत बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है:
भाजपा का आरोप: बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में कानून का शासन खत्म हो चुका है। उन्होंने इसे अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) के नेताओं को निशाना बनाने की साजिश करार दिया। भाजपा नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने चुनाव आयोग से संबंधित थाना प्रभारी (OC) के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
टीएमसी का जवाब: तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता तन्मय घोष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक होने का मतलब यह नहीं है कि हर घटना के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया जाए।
चुनाव आयोग की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल
मंगलवार को ही कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि आयोग हिंसा को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त नहीं) की नीति अपनाएगा और अधिकारियों को निष्पक्ष होकर काम करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम:
चुनाव की तारीखों के एलान से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 480 कंपनियां (केंद्रीय सशस्त्र बल) बंगाल भेज दी हैं।
राज्य प्रशासन और पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने हिंसा मुक्त चुनाव का आश्वासन दिया था, लेकिन बुधवार की घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है।
विशेषज्ञ की राय: बंगाल में चुनाव पूर्व हिंसा का यह पुराना इतिहास रहा है। यदि चुनाव आयोग और पुलिस शुरुआती दौर में ही कड़े कदम नहीं उठाते, तो मतदान प्रक्रिया शुरू होने तक स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है।





