चंडीगढ़ | शिक्षा डेस्क: हरियाणा में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने में अब महज दो दिन का समय बचा है, लेकिन प्रदेश के निजी स्कूल अपनी फीस और सुविधाओं का ब्योरा सार्वजनिक करने से बच रहे हैं। शिक्षा निदेशालय के सख्त आदेशों के बावजूद, राज्य के 74% निजी स्कूलों ने अब तक 'फॉर्म नंबर-6' नहीं भरा है। इस लापरवाही पर वरिष्ठ माध्यमिक निदेशक जितेन्द्र दहिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए 31 मार्च तक की अंतिम समयसीमा (Dead-line) तय की है।

आंकड़ों में स्थिति: पारदर्शिता से 'मुंह मोड़ा'

शिक्षा विभाग के पोर्टल के अनुसार, प्रदेश में मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है:

कुल निजी स्कूल: 9,230

फॉर्म भरने वाले स्कूल: 2,442 (मात्र 26.46%)

ब्योरा न देने वाले स्कूल: 6,788

नियम क्या है? हर मान्यता प्राप्त निजी स्कूल के लिए 'फॉर्म नंबर-6' भरना अनिवार्य है। इसमें स्कूल को अपनी सालाना फीस, फंड्स और दी जाने वाली सुविधाओं (जैसे लैब, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स) की पूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होती है, ताकि अभिभावकों के पास स्पष्ट डेटा उपलब्ध हो।

जिलों का हाल: हिसार आगे, पानीपत फिसड्डी

फॉर्म भरने की रफ्तार में जिलों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है:

हिसार (बेहतर प्रदर्शन): जिले के 646 स्कूलों में से 245 (37.93%) ने जानकारी साझा की है। हालांकि यहाँ भी 401 स्कूल अभी बाकी हैं।

पानीपत (कमजोर प्रदर्शन): शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का गृह जिला होने के बावजूद यहाँ स्थिति खराब है। 509 स्कूलों में से केवल 145 ने फॉर्म भरा है, जबकि 364 स्कूलों ने चुप्पी साध रखी है।

प्रशासनिक सख्ती: बंद हो सकता है MIS पोर्टल

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) वेद सिंह दहिया और निदेशालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 31 मार्च तक डेटा अपलोड नहीं किया गया, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी:

MIS पोर्टल ब्लॉक: जानकारी न देने वाले स्कूलों का 'मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' (MIS) पोर्टल बंद किया जा सकता है, जिससे स्कूल के ऑनलाइन कामकाज ठप हो जाएंगे।

अधिकारियों पर गाज: डीईओ (DEO) और डीईईओ (DEEO) को आदेश दिए गए हैं कि वे हर हाल में खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी करवाएं।

"हर निजी स्कूल को अपनी फीस बतानी अनिवार्य है। पारदर्शिता न बरतने वाले स्कूल संचालकों और संबंधित लापरवाह अधिकारियों से सख्ती से निपटा जाएगा।" — जितेन्द्र दहिया, निदेशक (वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा)

अभिभावकों के लिए क्यों जरूरी है यह जानकारी?

फॉर्म नंबर-6 भरे जाने से अभिभावकों को सत्र शुरू होने से पहले ही पता चल जाता है कि स्कूल कितनी फीस बढ़ा रहा है और वहां क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे स्कूलों द्वारा बीच सत्र में की जाने वाली अवैध वसूली या अचानक फीस वृद्धि पर रोक लगती है।