ग्वालियर/भिंड। मध्य प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। ग्वालियर की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यह कार्रवाई आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े एक मामले में लगातार अदालत में पेश न होने के चलते की गई है।

अदालत ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए भिंड के पुलिस अधीक्षक (SP) को सख्त निर्देश दिए हैं कि आगामी 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई में जीतू पटवारी की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए।

'हर जगह दिख रहे हैं, तो पुलिस क्यों नहीं ढूंढ पा रही?' – कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान विशेष अदालत ने पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:

"जब जीतू पटवारी के बयान और उनकी राजनीतिक गतिविधियां हर जगह (मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर) लगातार दिखाई दे रही हैं, तो फिर पुलिस उन्हें ढूंढ पाने में असमर्थ क्यों साबित हो रही है?"

दरअसल, कोर्ट ने इस मामले में पहले 16 जनवरी 2026 को जीतू पटवारी को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए समन जारी किया था। तय तारीख पर उनके उपस्थित न होने और लगातार अदालती कार्रवाई से दूरी बनाए रखने के कारण आखिरकार कोर्ट को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

क्या है यह पूरा मामला?

यह पूरा विवाद साल 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है।

आरोप: चुनाव प्रचार के दौरान जीतू पटवारी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के तत्कालीन उम्मीदवार देवाशीष जरारिया पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सांठगांठ करने का सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था।

FIR दर्ज: इस बयान को चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी पुलिस थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।

अब आगे क्या? भिंड पुलिस पर टिकी निगाहें

अदालत द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें भिंड पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वह तय समय-सीमा यानी 27 जुलाई तक अदालत के इस कड़े आदेश का किस तरह अनुपालन कराती है और कांग्रेस अध्यक्ष को कोर्ट में पेश करती है।