मुंबई: उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की बारामती में हुई विमान दुर्घटना के 13 दिन बाद, महाराष्ट्र का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। राकांपा (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार द्वारा इस घटना को '100 प्रतिशत घात' (साजिश) करार दिए जाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
रोहित पवार का 'साजिश' का दावा और विदेशी जांच की मांग
रोहित पवार ने मुंबई और दिल्ली में बाकायदा प्रजेंटेशन देकर हादसे की प्रकृति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है। रोहित ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किसी स्वतंत्र विदेशी एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।
शरद पवार बनाम रोहित पवार: परिवार के भीतर अलग सुर
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ रोहित पवार इसे साजिश बता रहे हैं, वहीं राकांपा संस्थापक शरद पवार ने इस पर बेहद सधा हुआ रुख अपनाया है। उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से एक 'दुर्घटना' माना और अपील की कि इस दुखद घटना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। शरद पवार के इस बयान ने अपनी ही पार्टी के युवा विधायक के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
सरकार का पक्ष: डीजीसीए की जांच पर भरोसा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार किसी भी संदेह को अनसुना नहीं कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया:
जांच जारी: नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए (DGCA) पहले से ही इसकी गहन तकनीकी जांच कर रहे हैं।
केंद्र को पत्र: राज्य सरकार ने स्वयं केंद्र को पत्र लिखकर विस्तृत जांच का आग्रह किया है।
विपक्ष को नसीहत: मुख्यमंत्री ने विपक्ष को सलाह दी कि सुरक्षा और हादसों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने से बचना चाहिए।
संजय राउत और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भी इस घटना को 'रहस्यमयी' बताते हुए आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने इसकी तुलना पूर्व में हुए कुछ अन्य संदिग्ध विमान हादसों से की। दूसरी ओर, राकांपा (अजीत गुट) के विधायक अनिल पाटिल ने कहा कि वे गहन जांच का समर्थन करते हैं, लेकिन रोहित पवार को जांच की दिशा भटकाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
| पक्ष | रुख/मांग |
|---|---|
| रोहित पवार | इसे 'शत-प्रतिशत घात' बताया; विदेशी एजेंसी से जांच की मांग। |
| देवेंद्र फडणवीस | DGCA जांच का हवाला दिया; राजनीति न करने की सलाह दी। |
| शरद पवार | महज एक 'दुर्घटना' करार दिया; शांति की अपील की। |
| संजय राउत | घटना को 'रहस्यमयी' बताया और पूर्व के मामलों से तुलना की। |
निष्कर्ष: अजीत पवार की सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा अब सुरक्षा प्रोटोकॉल से ज्यादा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का विषय बन गया है। DGCA की अंतिम रिपोर्ट आने तक महाराष्ट्र की राजनीति में इस 'रहस्य' पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।





