नई दिल्ली/बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही रस्साकशी अब निर्णायक मोड़ पर आती दिख रही है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद एक ऐसा बयान दिया है, जिसने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खेमे में हलचल तेज कर दी है।
"सिर्फ हवा खाने नहीं, राजनीति करने आया हूँ"
सोनिया गांधी के आवास '10 जनपथ' पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद बाहर निकले डीके शिवकुमार के तेवर बदले हुए थे। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा:
"मैं यहाँ सिर्फ दिल्ली की हवा में सांस लेने नहीं आया हूँ, बल्कि राजनीति करने आया हूँ। आने वाला समय ही हर बात का जवाब देगा और सब कुछ साफ कर देगा।"
शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल से भी लंबी चर्चा की। हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर इसे असम चुनाव और सांगठनिक विषयों पर चर्चा बताया, लेकिन उनके आत्मविश्वास ने 'नेतृत्व परिवर्तन' की अटकलों को हवा दे दी है।
डीके सुरेश का 'बाहरी बनाम मूल' वाला प्रहार
सियासी आग में घी डालने का काम डीके शिवकुमार के भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश के बयान ने किया है। सुरेश ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
वरीयता पर सवाल: पार्टी में 'बाहर से आए' नेताओं को उन लोगों की तुलना में अधिक महत्व मिल रहा है जो शुरू से कांग्रेस के प्रति वफादार रहे हैं।
सत्ता का बंटवारा: सुरेश ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री अपनी उस 'बात' पर कायम रहेंगे, जो सरकार बनने के समय सत्ता के बंटवारे (Power Sharing) को लेकर हुई थी।
(गौरतलब है कि सिद्धारमैया अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दौर में जनता दल में थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए थे।)
भविष्य की रणनीति और असम चुनाव
बैठक के बाद शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ मिलकर असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर भी चर्चा की है। लेकिन जानकारों का मानना है कि शिवकुमार का मुख्य एजेंडा कर्नाटक में अपनी दावेदारी को मजबूती से पेश करना था।
सियासी मायने: क्यों बढ़ी हलचल?
ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला: चर्चा है कि सरकार गठन के समय ढाई साल बाद नेतृत्व परिवर्तन का एक अलिखित समझौता हुआ था।
आलाकमान का रुख: राहुल गांधी से मुलाकात के बाद शिवकुमार के चेहरे की मुस्कान और 'समय बताएगा' जैसे बयान संकेत दे रहे हैं कि आलाकमान जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकता है।





