कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का रण आज भारी गहमागहमी, छिटपुट हिंसा और बमबारी की खबरों के बीच संपन्न हुआ। शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, 8 जिलों की 142 सीटों पर लगभग 90% मतदान दर्ज किया गया है। इससे पहले 23 अप्रैल को हुए प्रथम चरण में 92% से अधिक वोटिंग हुई थी, जो बंगाल के चुनावी उत्साह को दर्शाती है।
हालाँकि, लोकतंत्र के इस उत्सव पर हिंसा का साया भी मंडराता रहा। उत्तर से दक्षिण तक कई मतदान केंद्रों से तनाव और झड़पों की खबरें सामने आईं।
प्रमुख घटनाएं: हिंसा और झड़प की खबरें
बम और हथियारों की बरामदगी: पूर्व बर्धमान के बिरुरी प्राइमरी स्कूल के पास बैग में रखे बम मिलने से हड़कंप मच गया। बूथ नंबर 35 से मात्र 300 मीटर की दूरी पर मिले इन बमों को BDDS टीम ने तुरंत निष्क्रिय किया।
दक्षिण 24 परगना में भारी तनाव: बसंती इलाके में भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार पर कथित हमला हुआ और उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। वहीं भांगर में ISF और TMC के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसके बाद सुरक्षाबलों को लाठीचार्ज करना पड़ा।
1. उत्तर 24 परगना: मतदान खत्म होते ही पथराव और लाठीचार्ज
उत्तर 24 परगना के अरबिंद रैल इलाके में स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई जब बूथ नंबर 120 पर टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। मतदान खत्म होते ही दोनों पक्षों में पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करना पड़ा। फिलहाल इलाके में भारी तनाव है और केंद्रीय बल फ्लैग मार्च कर रहे हैं।
2. वर्धमान: स्कूल के पास बम मिलने से हड़कंप, NIA-CID अलर्ट
पूर्व वर्धमान के बिरुरी प्राथमिक विद्यालय के पास, जो कि एक मतदान केंद्र था, भारी मात्रा में बम बरामद किए गए। इस घटना ने चुनाव आयोग और प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA और CID की टीमों ने जांच संभाल ली है। एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या यह मतदान केंद्र पर बड़े हमले की साजिश थी।
3. भांगर: आमने-सामने नौशाद सिद्दीकी और टीएमसी
भांगर के प्रानगंज में आईएसएफ (ISF) प्रमुख नौशाद सिद्दीकी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हुई। नौशाद सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ता बूथ के 100 मीटर के भीतर मतदाताओं को डरा-धमका रहे हैं।
"जब मैं अपनी कार में था, तब टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मेरे साथ गाली-गलौज की। 2023 और 2024 में जो लोग वोट नहीं दे पाए थे, वे इस बार बदलाव के लिए निकल रहे हैं।" — नौशाद सिद्दीकी
4. दक्षिण 24 परगना: भाजपा उम्मीदवार पर जानलेवा हमला
बसंती विधानसभा क्षेत्र में स्थिति सबसे भयावह रही। यहाँ भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार की कार पर बूथ संख्या 76 के पास करीब 250 लोगों ने हमला कर दिया। सरदार ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने न केवल उनकी गाड़ी तोड़ी, बल्कि उनके सुरक्षाकर्मी की बंदूक छीनने की भी कोशिश की। उन्होंने इसे खुलेआम 'वोट लूट' की संज्ञा दी।
5. हुगली: फर्जी एजेंट को लेकर संघर्ष
हुगली के खानकुल में राजहाटी-1 पंचायत के बूथ नंबर 147 पर फर्जी पोलिंग एजेंट को लेकर टीएमसी और आईएसएफ समर्थकों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। वहीं रामचंद्रपुर आदर्श बिद्याभवन में भी भाजपा-टीएमसी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। हालांकि, सीआरपीएफ की महिला बटालियन ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में लिया।
सुरक्षा बलों की स्थिति: एक नजर में
| स्थान | घटना की प्रकृति | सुरक्षा कार्रवाई |
|---|---|---|
| अरबिंद रैल | भाजपा-टीएमसी हिंसक झड़प | लाठीचार्ज और फ्लैग मार्च |
| पूर्व वर्धमान | बमों की बरामदगी | NIA और CID द्वारा सघन जांच |
| बसंती | भाजपा उम्मीदवार की कार पर हमला | अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती |
| खानकुल | टीएमसी-आईएसएफ संघर्ष | सीआरपीएफ (CRPF) द्वारा नियंत्रण |
प्रशासनिक हस्तक्षेप: हावड़ा के बाली में EVM खराब होने पर मतदाताओं के हंगामे को शांत करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर
मतदान के दौरान राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए:
TMC के आरोप: कैनिंग पश्चिम से उम्मीदवार परेश राम दास ने आरोप लगाया कि CRPF जवानों ने उनके पोलिंग एजेंट की पिटाई की है।
BJP के आरोप: नादिया और श्यामपुकुर में भाजपा कैंपों पर हमले और एजेंटों को बैठने से रोकने के आरोप लगे। श्यामपुकुर उम्मीदवार पूर्णिमा चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि टीएमसी द्वारा एजेंटों को लगातार धमकियां दी जा रही हैं।
एक नजर में चुनाव का गणित
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| सीटें (दूसरा चरण) | 142 |
| कुल उम्मीदवार | 1448 |
| मतदान प्रतिशत (शाम 5 बजे तक) | 90% |
| प्रमुख क्षेत्र | उत्तर-24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नादिया, हावड़ा, बर्धमान |
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निष्कर्ष
अंतिम चरण के मतदान के साथ ही बंगाल की सत्ता की चाबी अब EVM में कैद हो गई है। जहाँ एक ओर भारी मतदान प्रतिशत बदलाव या सुदृढ़ीकरण के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षाबलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तनातनी ने चुनावी माहौल को बेहद संवेदनशील बनाए रखा। अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि बंगाल की जनता ने 'जय बांग्ला' के नारे को चुना है या 'परिवर्तन' की लहर को।





