कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक एक महीने पहले राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे और आर.एन. रवि की नियुक्ति ने राज्य में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि सी.वी. आनंद बोस को 'धमकाकर' इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया है।
"बंगाल तमिलनाडु नहीं है": ममता की नई राज्यपाल को चेतावनी
'SIR' के खिलाफ धरने को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल आर.एन. रवि की नियुक्ति पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
"जो व्यक्ति अब लाया गया है, वह भाजपा का परेड-मार्चिंग कैडर है। वह भाजपा के काम के अलावा कुछ नहीं करता। बंगाल अलग है; तमिलनाडु में स्टालिन और वहां की जनता ने उनका सामना किया है। चुनाव से ठीक एक महीने पहले बंगाल में राज्यपाल क्यों बदला गया?"
सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे पर 'धमकी' का दावा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उन्हें बोस के हटाए जाने के पीछे का असली कारण पता है, हालांकि उन्होंने उसे सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभवन को 'भाजपा का कार्यालय' बनाने की कोशिश की जा रही है। ममता ने पूछा, "क्या उनके पास नैतिकता की कोई समझ है? कई लोग नहीं चाहते कि संवैधानिक प्रमुख के कार्यालय का उपयोग चुनाव के दौरान भाजपा के लिए पैसे बांटने के लिए किया जाए।"
उपराष्ट्रपति धनखड़ का भी किया जिक्र
ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ का उदाहरण देते हुए केंद्र पर कार्यकाल पूरा न होने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा:
कार्यकाल पर सवाल: "वे किसी को अपना कार्यकाल पूरा नहीं करने दे रहे हैं। धनखड़ को भी पूरा नहीं करने दिया गया, उन्हें यहाँ से ले जाकर उपराष्ट्रपति बना दिया गया और अब वे व्यावहारिक रूप से 'नजरबंद' जैसी स्थिति में हैं।"
भाजपा का पलटवार: "दोहरे मापदंड अपना रही हैं मुख्यमंत्री"
ममता बनर्जी के इन आरोपों पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष ने कहा:
"यह वही ममता बनर्जी हैं जिन्होंने जगदीप धनखड़ और सी.वी. आनंद बोस की कड़ी आलोचना की थी। बोस के इस्तीफा देते ही वे उनके लिए अचानक 'अच्छे व्यक्ति' बन गए। हमने पहले कभी ऐसे विरोधाभासी रुख नहीं देखे।"
सोमवार को शपथ ले सकते हैं आर.एन. रवि
लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, नए राज्यपाल आर.एन. रवि के सोमवार को कोलकाता पहुंचने की संभावना है, जिसके तुरंत बाद वे शपथ ले सकते हैं। चुनाव की दहलीज पर खड़े बंगाल के लिए यह प्रशासनिक बदलाव आने वाले दिनों में राजभवन और नबन्ना (सचिवालय) के बीच टकराव को और बढ़ा सकता है।
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