कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर 'खेला' शुरू हो गया है। राज्य विधानसभा चुनाव की आधिकारिक घोषणा के साथ ही भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी पहली बिसात बिछा दी है। इस बार मुकाबला न केवल सत्ता का है, बल्कि साख का भी है। जहाँ भाजपा ने ममता बनर्जी के खिलाफ सुवेंदु अधिकारी को दो सीटों से उतारकर मास्टरस्ट्रोक चला है, वहीं ममता बनर्जी ने रणनीतिक रूप से भवानीपुर सीट को चुना है।

भाजपा की आक्रामक रणनीति: सुवेंदु बनाम ममता

भाजपा ने अपनी पहली सूची में 144 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। इसमें सबसे चौंकाने वाला और बड़ा फैसला सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों हाई-प्रोफाइल सीटों से उम्मीदवार बनाना है। भाजपा की यह रणनीति स्पष्ट है—वे ममता बनर्जी को उनके घर और पिछली हार वाली सीट, दोनों जगह घेरना चाहते हैं।

TMC का दांव: सुरक्षा और युवा शक्ति

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने 294 में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है (3 सीटें सहयोगी दल गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ी गई हैं)। इस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम की जगह भवानीपुर से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

भवानीपुर क्यों?

पिछली हार का सबक: 2021 में नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 1,956 वोटों के करीबी अंतर से हराया था।

सुरक्षित जीत की तलाश: नंदीग्राम में दोबारा हारने का जोखिम पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा सकता था। भवानीपुर ममता का पुराना गढ़ है, जहाँ से उन्होंने उपचुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी।

विपक्ष को जवाब: किसी तीसरी नई सीट से चुनाव लड़ने पर 'डर' का संदेश जा सकता था, इसलिए भवानीपुर को ही सबसे बेहतर विकल्प माना गया।

बीते चुनाव के समीकरण: एक नजर में

दल2016 की सीटें2021 की सीटेंवर्तमान स्थिति
TMC211213सत्ता की हैट्रिक के बाद चौथी पारी की कोशिश
भाजपा0377मुख्य विपक्षी दल के रूप में बड़ी छलांग
अन्यभारी नुकसानलगभग शून्यकांग्रेस और वामपंथियों का कमजोर होना

क्या सुवेंदु करेंगे दोबारा करिश्मा?

टिकट मिलने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने जीत का हुंकार भरते हुए कहा है कि वे नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों ही सीटों पर कमल खिलाएंगे। भाजपा जहाँ अपने पुराने दिग्गजों और 'चेक-मेट' की रणनीति पर चल रही है, वहीं टीएमसी ने अपनी लिस्ट में युवा चेहरों को अधिक स्थान देकर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) को काटने की कोशिश की है।

नतीजों का इंतजार: बंगाल में पहली बार दो चरणों में चुनाव होने जा रहे हैं। अब देखना यह है कि सुवेंदु का 'डबल अटैक' काम आता है या ममता का 'सुरक्षित किला' उन्हें दोबारा सत्ता के शिखर पर पहुँचाता है। अंतिम फैसला 4 मई को जनता के जनादेश के साथ स्पष्ट होगा।