पटना (बिहार):

बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखींद्र पासवान की जनसुनवाई में शनिवार को भ्रष्टाचार का एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत मिलने वाली अनुदान राशि के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का खुलासा खुद मंत्री के सामने लाइव फोन कॉल पर हो गया।

क्या है पूरा मामला?

सीतामढ़ी निवासी फरियादी कमलेश पासवान ने मंत्री के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराई कि एससी-एसटी केस संख्या 129/26 में मिलने वाली सरकारी अनुदान राशि को जारी करने के बदले उससे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री ने फरियादी से संबंधित कर्मी को तुरंत फोन लगाने को कहा। फरियादी ने जैसे ही कॉल किया, आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर चंदन कुमार ने बेखौफ होकर मंत्री के सामने ही दोबारा 50 हजार रुपये की मांग दोहरा दी। यह बातचीत सुनकर वहां मौजूद सभी अधिकारी और लोग स्तब्ध रह गए।

मंत्री का कड़ा रुख: '1 घंटे में करो सस्पेंड'

ऑन-कॉल घूस मांगने की पुष्टि होते ही मंत्री लखींद्र पासवान का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तुरंत सीतामढ़ी के जिला कल्याण पदाधिकारी (DWO) को फोन लगाया और सख्त लहजे में निर्देश दिए:

"अधिकारी जी, चंदन कुमार नाम का डाटा एंट्री ऑपरेटर मेरे सामने फोन पर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। इसकी रिकॉर्डिंग मेरे पास है। उसे 1 घंटे के भीतर निलंबित कर कार्रवाई करें, वरना आपके खिलाफ भी सख्त कदम उठाया जाएगा।"

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश

मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने फरियादी को न्याय का भरोसा दिलाते हुए कहा कि पात्रता के अनुसार उन्हें बिना किसी बाधा के नियमानुसार अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

इस घटना के बाद कल्याण विभाग में हड़कंप मच गया है और आरोपी के खिलाफ विभागीय व कानूनी जांच शुरू कर दी गई है।