पटना। बिहार के कृषि और स्टार्टअप क्षेत्र के लिए एक बड़ी और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य सरकार की 'बिहार स्टार्टअप' नीति से जुड़े अग्रणी एग्रीटेक और डीपटेक स्टार्टअप 'बीरो पावर प्राइवेट लिमिटेड' को स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित "एट होम" समारोह के लिए चुना गया है।

देशभर के शीर्ष पांच चुनिंदा स्टार्टअप्स में स्थान पाना बीरो पावर के नवाचार, सामाजिक प्रभाव और कृषि क्षेत्र में इसके अतुलनीय योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक और गरिमामयी समारोह में कंपनी की सह-संस्थापक माया रामसमुझ वर्मा बीरो पावर का प्रतिनिधित्व करेंगी।

डाक विभाग ने घर पहुँचकर सौंपा आमंत्रण पत्र

राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी आधिकारिक आमंत्रण पत्र गुरुवार को भारतीय डाक विभाग के माध्यम से माया रामसमुझ वर्मा के पटना स्थित आवास पर ससम्मान पहुँचाया गया। कंकड़बाग उप-मंडल के डाक निरीक्षक विमल दीप कुमार ने अपनी टीम के साथ आमंत्रण पत्र सौंपते हुए स्टार्टअप की इस उपलब्धि पर बधाई दी।

किसानों को समृद्ध बना रहा 'बीरो पावर' का डीपटेक नवाचार

तकनीकी सहयोग: बीरो पावर संस्था SABAGRIs और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) के सहयोग से किसानों के लिए आधुनिक और किफ़ायती कृषि तकनीकों का विकास कर रही है।

मैन्युफैक्चरिंग प्लांट: कंपनी की विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) इकाई पटना जिले के बिहटा (सिकंदरपुर) में स्थित है, जहाँ से निर्मित आधुनिक कृषि उपकरण किसानों तक पहुँच रहे हैं।

अनुभवी नेतृत्व: कंपनी के संस्थापक एवं सीईओ रजनीश कुमार आईआईएम काशीपुर (IIM Kashipur) के पूर्व छात्र हैं और उद्योग जगत में 14 वर्षों का व्यापक अनुभव रखते हैं। वर्ष 2021 से वे बिहार में रहकर कृषि नवाचारों को धरातल पर उतार रहे हैं।

राष्ट्रीय पटल पर पहले भी जमा चुके हैं धाक

बीरो पावर का राष्ट्रपति भवन के लिए चयन कोई पहला राष्ट्रीय सम्मान नहीं है। इससे पहले भी इस एग्रीटेक स्टार्टअप को कई प्रतिष्ठित मंचों पर सराहा जा चुका है:

IIT रोपड़ AWaDH द्वारा देश के 'टॉप-100 इनोवेटिव स्टार्टअप्स' में चयन।

टाटा सोशल एंटरप्राइज चैलेंज (Tata Social Enterprise Challenge) में 'टॉप-50' स्टार्टअप्स में स्थान।

बिहार के एक स्थानीय स्टार्टअप का देश के शीर्ष 5 स्टार्टअप्स में शामिल होना राज्य के युवाओं, नवाचार और एग्रीटेक क्रांति के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।