लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में संगठनात्मक बदलावों और उत्तराधिकार को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया है। लखनऊ में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक में जहां एक तरफ आकाश आनंद नदारद रहे, वहीं उनके छोटे भाई ईशान आनंद पहली बार पार्टी के सबसे बड़े आधिकारिक मंच पर मायावती और आनंद कुमार के साथ अग्रिम पंक्ति में बैठे नजर आए।

नीला पटका पहने ईशान आनंद की इस मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज कर दी है कि क्या मायावती बसपा में नई पीढ़ी के नए चेहरे को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।

आकाश आनंद का सियासी सफर: कभी उत्तराधिकारी, कभी जिम्मेदारी से दूर

आकाश आनंद का बसपा में राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है:

  • दिसंबर 2023: मायावती ने आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया और अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया।
  • मई 2024 व मार्च 2025: पार्टी से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियों से अलग किया गया और फिर वापसी हुई।
  • हालिया गतिविधियां (2026): यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए आकाश ने हाथरस और नोएडा में रैलियां कर युवाओं को एकजुट करने का प्रयास किया।
  • ताजा स्थिति: मायावती ने एक बार फिर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से अलग कर दिया है। मायावती के अनुसार, आकाश को राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व (Mature) होने की आवश्यकता है।

कौन हैं ईशान आनंद और क्या होगी नई भूमिका?

लंदन की वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी (University of Westminster) से लॉ ग्रेजुएट ईशान आनंद इससे पहले भी मायावती के जन्मदिन और कुछ पार्टी कार्यक्रमों में नजर आ चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मंच पर यह उनका पहला आधिकारिक पदार्पण है।

  • युवा विंग की कमान संभव: सूत्रों के मुताबिक, मायावती पार्टी की यूथ विंग को मजबूत करने के लिए ईशान आनंद को इसकी बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती हैं।
  • उत्तराधिकारी पर मायावती का रुख: हालांकि, इसे सीधे उत्तराधिकार से जोड़ना जल्दबाजी होगी। मायावती पूर्व में स्पष्ट कर चुकी हैं कि उनके रहते कोई उत्तराधिकारी घोषित नहीं होगा।

2027 चुनाव और बसपा का सियासी संदेश

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में जुटी बसपा के लिए यह फेरबदल काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को सहेजने के साथ-साथ युवा मतदाताओं को जोड़ने की पुरजोर कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि ईशान आनंद की यह एंट्री महज एक संगठनात्मक प्रयोग है या मायावती की दूरगामी सियासत का कोई बड़ा मोड़।