चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने पिछले साल इन नेताओं के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया था, जिसे अब प्रशासन ने पलटने की मांग की है।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 10 जनवरी 2020 का है, जब आम आदमी पार्टी (उस समय विपक्ष में थी) तत्कालीन पंजाब सरकार के खिलाफ चंडीगढ़ में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन कर रही थी।

आरोप: प्रदर्शन के दौरान आप नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई थी। आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की।

घायल पुलिसकर्मी: सेक्टर-3 थाने की एक महिला कांस्टेबल की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया था। शिकायत में कहा गया था कि इस हंगामे में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

नियमों का उल्लंघन: नेताओं पर तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट (DC) के आदेशों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा था।

हाईकोर्ट से मिली थी राहत

पिछले साल पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए भगवंत मान, हरपाल सिंह चीमा, और अमन अरोड़ा समेत कई नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इन नेताओं को बड़ी राहत दी थी, जिससे प्रशासन की कानूनी कार्रवाई ठप हो गई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

चंडीगढ़ प्रशासन (UT Administration) का तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी आदेशों की अवहेलना एक गंभीर कृत्य है। प्रशासन ने हाईकोर्ट के तर्क को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इस मामले में दोबारा सुनवाई की जाए और FIR को बहाल किया जाए।

इन नेताओं की बढ़ी मुश्किलें:

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद निम्नलिखित नेताओं की कानूनी मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं:

भगवंत मान (मुख्यमंत्री, पंजाब)

हरपाल सिंह चीमा (वित्त मंत्री, पंजाब)

अमन अरोड़ा (कैबिनेट मंत्री, पंजाब)

'आप' के कई अन्य तत्कालीन विधायक और वरिष्ठ नेता।

निष्कर्ष: यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि एक तरफ राज्य के मुख्यमंत्री हैं और दूसरी तरफ केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वह हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है या मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के खिलाफ फिर से कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश देता है।