चंडीगढ़: खूबसूरत शहर चंडीगढ़ के नौनिहालों के चेहरों से लाली गायब हो रही है और उनके हाथ सफेद पड़ रहे हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संसद में पेश की गई एक हालिया रिपोर्ट ने शहर में बच्चों के स्वास्थ्य की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ में पांच वर्ष तक की उम्र के 54.6 प्रतिशत बच्चे एनीमिया (खून की कमी) से गंभीर रूप से जूझ रहे हैं।

यह स्थिति अभिभावकों और स्वास्थ्य विभाग दोनों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की थाली से दाल, हरी सब्जियां और पौष्टिक आहार गायब हो चुके हैं और उनकी जगह जंक फूड व असंतुलित खानपान ने ले ली है।

केवल दूध पर निर्भरता है खतरनाक: डॉ. दीपक बंसल

पीजीआई (PGI) के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के हेमेटोलाजी एवं आन्कोलाजी यूनिट के डाॅ. दीपक बंसल ने बताया कि पांच वर्ष तक के बच्चों में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होने पर उसे एनीमिया माना जाता है।

डॉक्टर की सलाह: "अक्सर माता-पिता बच्चों को ठोस आहार देने के बजाय केवल दूध पिलाने पर जोर देते हैं। दूध में आयरन की मात्रा बहुत कम होती है। एक से पांच वर्ष तक के बच्चों को 600 मिलीलीटर से अधिक दूध नहीं देना चाहिए। दाल, सब्जियां और अंडा न मिलने से बच्चों में आयरन की कमी हो जाती है।"

शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा प्रहार

लंबे समय तक शरीर में खून की कमी रहने से बच्चों के भविष्य पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। एनीमिया के कारण बच्चों में ये लक्षण और नुकसान देखे जा रहे हैं:

दैनिक लक्षण: लगातार थकान, कमजोरी, चिड़चिड़ापन और भूख न लगना।

मानसिक असर: पढ़ाई और खेल-कूद में ध्यान न लगना।

शारीरिक विकास: बच्चों की लंबाई, वजन और समग्र मानसिक विकास का रुक जाना।

आसपास के राज्यों की तुलना में चंडीगढ़ की स्थिति बेहतर, पर चुनौती बड़ी

संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, हालांकि चंडीगढ़ की स्थिति अपने पड़ोसी राज्यों की तुलना में थोड़ी बेहतर है, लेकिन 50% से अधिक बच्चों का ग्रसित होना बेहद डरावना है।

एनीमिया से पीड़ित बच्चों का क्षेत्रीय तुलनात्मक विवरण:

राज्य / केंद्र शासित प्रदेशएनीमिया से पीड़ित बच्चे (%)
जम्मू-कश्मीर72.4%
पंजाब71.1%
हरियाणा70.4%
हिमाचल प्रदेश55.4%
चंडीगढ़54.6%

बचाव का तरीका: बच्चों की थाली में शामिल करें ये 5 चीजें

डॉक्टरों के अनुसार, खानपान की आदतों में थोड़ा सा सुधार करके बच्चों को इस साइलेंट किलर से बचाया जा सकता है। बच्चों की डाइट में इन्हें तुरंत शामिल करें:

अनाज और दलिया: दाल, खिचड़ी और दलिया।

हरी सब्जियां: पालक, मेथी और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां।

पारंपरिक मीठा: गुड़ और मूंगफली की चिक्की।

फल और प्रोटीन: अंडा और सभी मौसमी फल।

सुपरफूड: अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स)।

समय रहते अगर अभिभावक सजग नहीं हुए, तो जंक फूड की यह लत आने वाली पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना देगी।