राजकोट (गुजरात): गुजरात की राजकोट ग्रामीण पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर के अनुसार, इस रैकेट ने न केवल आम लोगों को ठगा, बल्कि जीएसटी (GST) और टीडीएस (TDS) नियमों की खामियों का फायदा उठाने के लिए कृषि मंडी की फर्मों का मुखौटा इस्तेमाल किया।

ताजा गिरफ्तारियां और उनकी भूमिका

गुरुवार को हुई कार्रवाई में तीन नए नाम सामने आए हैं:

आदिलुद्दीन मोहम्मद (निवासी तेलंगाना): यह मुख्य रूप से 'म्यूल अकाउंट्स' (फर्जी बैंक खाते) में पैसा ट्रांसफर करने और फिर 'आंगड़िया' (पारंपरिक कूरियर) चैनल के जरिए नकदी वापस प्राप्त करने का काम संभालता था।

मिहिर रंगानी और हिरेन लिम्बसिया (निवासी राजकोट): इन दोनों की जिम्मेदारी बैंक खाते उपलब्ध कराना, उनसे नकदी निकालना और फंड ट्रांसफर करना था।

APMC खातों का 'रणनीतिक' दुरुपयोग

जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने विभिन्न निजी बैंकों में 15 खाते खोले थे। इन खातों को जानबूझकर मार्केटिंग यार्ड (APMC) फर्मों के नाम पर संचालित किया जा रहा था।

APMC फर्मों को ही क्यों चुना गया?

नियमों में छूट: पुलिस के अनुसार, APMC से जुड़े खातों में GST और TDS के अनुपालन की आवश्यकताएं अन्य व्यावसायिक खातों की तुलना में कम जटिल होती हैं।

तीन प्रकार के अवैध फंड: इन खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी की कमाई, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े लेनदेन और GST चोरी से जुड़े धन को खपाने (Channeling) के लिए किया जा रहा था।

आंकड़ों में घोटाले की गंभीरता

अब तक की जांच में इन 15 बैंक खातों के माध्यम से लगभग ₹1500 करोड़ का लेनदेन पाया गया है। साइबर क्राइम पोर्टल (1930) पर इस गिरोह के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा है:

विवरणगुजरातअन्य राज्यकुल
दर्ज शिकायतें21159180
धोखाधड़ी की राशि₹2.94 करोड़₹20.21 करोड़₹23.15 करोड़*

*यह राशि उन शिकायतों से जुड़ी है जो आधिकारिक रूप से पोर्टल पर दर्ज हैं, जबकि कुल टर्नओवर ₹1500 करोड़ तक फैला हुआ है।

आगे की कार्रवाई

13 फरवरी को हुई 6 गिरफ्तारियों के बाद, इन तीन नई गिरफ्तारियों ने जांच को और पुख्ता कर दिया है। पुलिस अब उन 'आंगड़िया' नेटवर्क की भी जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल अवैध नकदी को इधर-उधर करने के लिए किया गया था। साथ ही, निजी बैंकों के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है जिन्होंने इन संदेहास्पद APMC खातों को खोलने की अनुमति दी।