भारत ने रक्षा तकनीक और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अगली पीढ़ी के सैन्य उपकरणों के लिए स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित और परीक्षण कर लिया है। रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, यह उपलब्धि देश को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक गेम-चेंजर साबित होगी।

तकनीकी विशेषताएं और प्रमुख क्षमताएं

  • अभूतपूर्व पावर डेंसिटी: मात्र 3.5×3 मिलीमीटर आकार की यह स्वदेशी GaN चिप 30 वॉट तक की जबरदस्त पावर आउटपुट देने में सक्षम है।
  • 300 गुना अधिक दक्षता: पारंपरिक सिलिकॉन-आधारित तकनीक की तुलना में इस GaN-आधारित MMIC (मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट) टेक्नोलॉजी की कार्यक्षमता लगभग 300 गुना अधिक है।
  • X-बैंड फ्रिक्वेंसी: यह तकनीक X-बैंड में निर्बाध रूप से काम कर सकती है, जो आधुनिक रडार और सटीक नेविगेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सैन्य प्रणालियों और रक्षा उपकरणों में अनुप्रयोग

DRDO की सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (SSPL) द्वारा विकसित इस तकनीक और सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) वेफर्स का उपयोग कई आधुनिक सैन्य प्रणालियों में होगा:

  • रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: रडार, जैमर्स और सर्विलांस उपकरणों का आकार व वजन काफी कम होगा, जबकि उनकी रेंज और पावर दोगुनी हो जाएगी।
  • संचार व ड्रोन सिस्टम: कम शोर (Low Noise) में दूरस्थ संकेतों को पकड़ने और बेहद मजबूत सिग्नल ट्रांसमिट करने वाले स्वदेशी उपकरण अब देश में ही बनेंगे।

रणनीतिक महत्व और विदेशी निर्भरता से मुक्ति

अब तक भारत इस तरह के हाई-एंड एडवांस्ड सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भर था, जिन पर अक्सर वैश्विक निर्यात प्रतिबंध (Export Restrictions) लागू रहते हैं। इस स्वदेशी खोज से भारत की विदेशी निर्भरता खत्म होगी।

इसके साथ ही, iDEX (इन्नोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) पहल के तहत Agnit Semiconductors के साथ एडवांस्ड GaN सेमीकंडक्टर विकसित करने का करार किया गया है, जो भारत के रक्षा उद्योग को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।