रांची।

झारखंड में ब्रेन मलेरिया को लेकर जारी राज्यव्यापी अलर्ट के बीच रांची के तमाड़ प्रखंड के बेलबेड़ा गांव से एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए विशेष जांच अभियान में इस गांव के 51 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 17 लोग ब्रेन मलेरिया (पीएफ मलेरिया) से संक्रमित पाए गए हैं।

इस गंभीर बीमारी के बीच सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहाँ के ग्रामीण अंग्रेजी (एलोपैथिक) दवाइयाँ खाने से साफ इनकार कर रहे हैं। उनका मानना है कि वे पारंपरिक जड़ी-बूटियों से ही ठीक हो जाएंगे। ग्रामीणों के इस रुख और खून की जांच न कराने की जिद के कारण इलाके में मलेरिया को नियंत्रित करना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।

300 की आबादी में बमुश्किल मिले 51 सैंपल

गुरुवार को सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार के व्यक्तिगत प्रयासों और काउंसलिंग के बाद ग्रामीणों को जागरूक किया गया। हालांकि, इसके बावजूद मौके पर मौजूद करीब 300 लोगों में से केवल 51 लोग ही ब्लड सैंपल देने के लिए राजी हुए। वेक्टर जनित रोग (वीबीडी) अधिकारी और आईडीएसपी (IDSP) की संयुक्त टीम ने प्रभावित गांव का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की है।

27 जून से लगातार जारी है सर्वे

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बेलबेड़ा गांव के 10 टोलों में बीते 27 जून से ही घर-घर सर्वे, स्वास्थ्य जांच और दवाओं का वितरण किया जा रहा है।

अब तक कुल 1327 लोगों की निगरानी की जा चुकी है।

इनमें से 25 लक्षणयुक्त (Symptomatic) और 150 लक्षणहीन (Asymptomatic) मामलों की पहचान हुई है।

संक्रमित पाए गए 17 मरीजों में से दो की हालत गंभीर (खतरनाक लक्षण) है, जबकि 15 में अभी बड़े लक्षण नहीं हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि इन मरीजों ने समय पर दवा नहीं ली, तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।

सिविल सर्जन की अपील:

"जनता घबराए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की टीम का सहयोग करे। बुखार या कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। प्रभावित क्षेत्र में लगातार मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं और स्थिति नियंत्रण में है।"

जानें क्या है 'ब्रेन मलेरिया' और इसके लक्षण

ब्रेन मलेरिया, सामान्य मलेरिया का ही एक बेहद गंभीर और खतरनाक रूप है, जो मुख्य रूप से प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium Falciparum) नामक परजीवी के संक्रमण से होता है। समय पर सटीक इलाज न मिलने पर यह परजीवी सीधे मस्तिष्क (Brain) को प्रभावित करता है, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। इसकी पुष्टि केवल रक्त जांच (Blood Test) से ही संभव है।

पहचान के प्रमुख लक्षण:

तेज बुखार के साथ अत्यधिक ठंड लगना।

लगातार और तेज सिरदर्द होना।

बेहोशी आना या भ्रम (Confusion) की स्थिति बनना।

दौरे (फिट) आना।

बोलने या चलने-फिरने में कठिनाई होना।

बार-बार उल्टी होना और शरीर में अत्यधिक कमजोरी आना।

इलाज:

ब्रेन मलेरिया के मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती करना अनिवार्य होता है। जहाँ उन्हें इंजेक्शन आधारित एंटी-मलेरियल दवाएं, आवश्यक तरल पदार्थ (Fluids) और जरूरत पड़ने पर आईसीयू (ICU) बैकअप के साथ इलाज दिया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी के मरीजों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।