कांकेर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के लगभग एक माह बाद कांकेर जिले से सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक घटना सामने आई है। छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा पूर्व में बिछाई गई एक आईईडी (IED) की चपेट में आने से जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के तीन जवान घायल हो गए।
डिमाइनिंग ऑपरेशन के दौरान हुआ हादसा
शनिवार को डीआरजी की एक विशेष टीम नारायणपुर सीमा से लगे जंगलों में 'डिमाइनिंग ऑपरेशन' चला रही थी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाए गए घातक विस्फोटकों को खोजकर उन्हें सुरक्षित रूप से नष्ट करना था। इसी दौरान, टीम का संपर्क एक छिपे हुए विस्फोटक से हुआ, जिसके परिणामस्वरूप जोरदार धमाका हुआ और तीन जवान इसकी चपेट में आ गए।
जवानों की स्थिति और त्वरित उपचार
विस्फोट के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और घायल जवानों को जंगल से बाहर निकालकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया।
वर्तमान स्थिति: चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, तीनों जवानों की हालत फिलहाल स्थिर है।
अगला कदम: बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र (Higher Medical Facility) में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
'नक्सल मुक्त' राज्य की घोषणा के बाद पहली चुनौती
यह विस्फोट सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि 31 मार्च को ही राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को 'नक्सल मुक्त' घोषित किया था। इस घोषणा के बाद नक्सली गतिविधियों या उनके द्वारा छोड़े गए विस्फोटकों से जुड़ी यह पहली बड़ी घटना है, जिसने यह संकेत दिया है कि इलाकों को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए अभी सघन जांच की आवश्यकता है।
इलाके में व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी
घटना के तुरंत बाद अतिरिक्त बल मौके पर भेज दिया गया है। सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। पुलिस महानिरीक्षक और स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इलाके में कोई अन्य आईईडी न बचा हो, ताकि स्थानीय ग्रामीणों और सुरक्षा बलों की सुरक्षा पुख्ता की जा सके।
अधिकारियों का संदेश: "यह विस्फोट नक्सलियों की हताशा का प्रतीक है जो उनके पीछे छोड़े गए 'डेथ ट्रैप' के रूप में सामने आया है। हमारी टीमें सतर्क हैं और क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित करने तक ऑपरेशन जारी रहेगा।"





