रायपुर। छत्तीसगढ़ में सामाजिक सद्भाव को अक्षुण्ण रखने और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश में 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026' आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गया है, जिसकी अधिसूचना राजपत्र (Gazette) में जारी कर दी गई है।
इस नए और बेहद कड़े कानून के तहत बल, प्रलोभन, लालच या धोखाधड़ी से कराए जाने वाले अवैध मतांतरण पर आजीवन कारावास और भारी जुर्माने का प्रविधान किया गया है। साथ ही, केवल मतांतरण के उद्देश्य से किए गए विवाह को भी कानूनन शून्य (अमान्य) घोषित किया जा सकेगा।
10 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू हुआ नया कानून
यह कानून 10 जुलाई 2026 से पूरे छत्तीसगढ़ में प्रभावी हो गया है। उल्लेखनीय है कि यह ऐतिहासिक विधेयक 19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुआ था, जिसके बाद 8 अप्रैल को राज्यपाल रमेन डेका ने इस पर अपनी स्वीकृति दी थी। यह नया कानून अविभाजित मध्य प्रदेश के समय के पुराने 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968' को प्रतिस्थापित करेगा।
"प्रदेश में सामाजिक समरसता को सुरक्षित रखने के लिए मतांतरण विरोधी कानून को पूरी तरह लागू कर दिया गया है। अब राज्य में मतांतरण के लिए निर्धारित कड़े नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।"
— विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
मतांतरण के लिए अब अपनानी होगी यह पारदर्शी प्रक्रिया
अब स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्तियों को एक सख्त प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना होगा:
प्राधिकृत आवेदन: मतांतरण के इच्छुक व्यक्ति को सबसे पहले जिला प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा।
सार्वजनिक सूचना: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस आवेदन की जानकारी को विभाग की वेबसाइट, संबंधित ग्राम पंचायत और स्थानीय थाने के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा।
दावा-आपत्ति: आवेदन के बाद 30 दिनों के भीतर किसी भी प्रकार की दावा-आपत्ति दर्ज कराने और उसकी जांच करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
90 दिनों की समय-सीमा: यदि निर्धारित तिथि से 90 दिनों के भीतर मतांतरण की प्रक्रिया संपन्न नहीं होती है, तो आवेदन को स्वतः ही निरस्त (expired) मान लिया जाएगा।
सजा और जुर्माने के कड़े प्रविधान
नए कानून के तहत अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा और जुर्माने को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
| अपराध की श्रेणी | जेल की सजा | न्यूनतम जुर्माना |
|---|---|---|
| सामान्य मामले (अवैध/जबरन मतांतरण) | 7 से 10 वर्ष | ₹5 लाख |
| विशेष श्रेणी (यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, SC, ST या OBC हो) | 10 से 20 वर्ष | ₹10 लाख |
| सामूहिक मतांतरण (एक से अधिक व्यक्तियों का मतांतरण) | 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास | ₹25 लाख |
देश के 12 राज्यों में अब लागू है यह कानून
वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर कोई केंद्रीय मतांतरण विरोधी कानून अस्तित्व में नहीं है। हालांकि, छत्तीसगढ़ सहित देश के कुल 12 राज्यों (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र) में राज्य स्तर पर इस तरह के कानून लागू हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने इन सभी राज्यों के कानूनों का गहन अध्ययन करने के बाद ही इस नए मसौदे को अंतिम रूप दिया है।





