भारत के करीब 200 लाख करोड़ रुपये के विशाल कंज्यूमर बाजार में शुद्धता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बाजार में बिकने वाले पनीर से लेकर शराब की बोतलों तक, और बड़े रेस्टोरेंट से लेकर ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स तक हर जगह कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस सख्ती से कंपनियों की ऑपरेशनल लागत बढ़ने वाली है, जिसका असर अंततः बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
1. शराब ब्रांड्स पर सबसे तगड़ी कार्रवाई
FSSAI की इस सख्ती का सबसे कड़ा असर शराब कंपनियों पर देखने को मिला है। हाल ही में यूनाइटेड स्पिरिट्स की बेंगलुरु फैसिलिटी से नियमों का पालन न करने के कारण शराब की हजारों पेटियां जब्त की गईं। पुरानी बोतलों के दोबारा इस्तेमाल और कुछ ब्रांड्स में फ्लेवर मिलाने के मामलों पर सवाल खड़े हुए हैं। इसके चलते यूनाइटेड स्पिरिट्स और पेरनोड रिकार्ड जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने फॉर्मूलों में बदलाव करना पड़ रहा है, जिससे उनका कानूनी और अनुपालन खर्च (Compliance Cost) काफी बढ़ गया है।
2. भ्रामक दावों और विज्ञापनों पर नकेल
रोजमर्रा का सामान बनाने वाली (FMCG) कंपनियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। 'सौ फीसदी शुद्ध' या 'नेचुरल' होने का दावा करने वाली कई नामी कंपनियों—जैसे एमवे इंडिया, इमामी, बॉन बिस्कुट और अपीस इंडिया—को नियामक के दबाव में अपने दावे वापस लेने पड़े हैं। डाबर और लोटे इंडिया जैसी कंपनियों को भी नोटिस मिलने के बाद सुधारात्मक कदम उठाने पड़े हैं। अब कंपनियों को नए प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग और पैकेजिंग पर भारी भरकम रकम खर्च करनी होगी।
इसे भी पढ़ेंः FSSAI की जांच में नेस्ले इंडिया का 'लो-फैट डेयरी व्हाइटनर' असुरक्षित: FSSAI और कंपनी के दावों के बीच जंग
3. पिज्जा-बर्गर आउटलेट्स और रेस्टोरेंट सील
बाहर का खाना खाने वाले शौकीनों के लिए भी यह बड़ी चेतावनी है। खराब गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट का कुकिंग ऑयल मिलने के कारण मंगलुरु में एक केएफसी आउटलेट को सील कर दिया गया। वहीं, महाराष्ट्र में फूड विभाग ने जुबिलेंट फूडवर्क्स के चार डोमिनोज आउटलेट्स और सैफायर फूड्स के एक पिज्जा हट आउटलेट का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। साफ-सफाई और स्टोरेज में कमियों के कारण इन ब्रांड्स की साख पर भी असर पड़ा है।
4. ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स रडार पर
अमेज़ॅन, स्विगी इंस्टामार्ट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट इंडिया और जेप्टो जैसे प्रमुख ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी जांच के दायरे में आ गए हैं। उन पर खराब या अमानक खाद्य सामग्री की सप्लाई के आरोप हैं।
इसका आम आदमी की जेब पर क्या असर होगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि शुरुआत में यह लागत कंपनियां खुद वहन करेंगी, लेकिन लंबी अवधि में इस पूरी सख्ती का आर्थिक बोझ आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है। कंपनियों द्वारा टेस्टिंग, लीगल फीस और क्वालिटी कंट्रोल पर खर्च बढ़ाने से उत्पादों के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, लंबे समय में इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और बेहतर उत्पाद मिलने की उम्मीद है।
#FSSAI #FoodSafety #ConsumerMarket #IndianEconomy #LiquorBrands #OnlineDelivery #RestaurantHygiene #BusinessNews #MarketUpdate





